गन्ना किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने और चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाने की मांग पर विचार करने के लिए केंद्र सरकार ने पांच सदस्यीय समिति बनाई है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में गठित यह समिति गन्ने की खेती की लागत, किसानों को मिलने वाले दाम और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति का अध्ययन करेगी। साथ ही, चीनी की एक्स-मिल कीमत बढ़ाने की जरूरत पर भी सुझाव देगी।
खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, यह समिति कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों की समस्याओं और चीनी उद्योग से जुड़े दूसरे मुद्दों की समीक्षा करेगी। यह फैसला 12 अक्टूबर को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ गन्ना किसान प्रतिनिधियों की बैठक के बाद लिया गया है।
समिति में कौन-कौन शामिल?
रमेश चंद की अध्यक्षता वाली इस समिति में कृषि आयुक्त, संयुक्त सचिव (चीनी), संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) और निदेशक (चीनी) को सदस्य बनाया गया है। ये सभी कृषि, खाद्य और उपभोक्ता मामलों से जुड़े विभागों के अधिकारी हैं।
बैठक के बाद सरकार ने कहा था कि समिति में केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों, किसान संगठनों, चीनी मिलों और विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। हालांकि, अधिसूचना में इन सभी पक्षों को समिति का सदस्य नहीं बनाया गया है। इसके बजाय समिति को किसानों, चीनी मिलों, राज्य सरकारों, संबंधित मंत्रालयों, शोध संस्थानों और विशेषज्ञों से बातचीत करने को कहा गया है।
गन्ने का उचित मूल्य तय करने पर होगा विचार
समिति गन्ने की खेती में आने वाली लागत, कृषि संबंधी खर्च और दूसरे जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए किसानों को उचित दाम दिलाने के उपाय सुझाएगी। इसके साथ ही चीनी मिलों की लंबे समय से चली आ रही मांग पर भी विचार किया जाएगा, जिसमें चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत बढ़ाने की मांग शामिल है।
समिति चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में बदलाव की जरूरत का आकलन करेगी। इसके लिए चीनी के उत्पादन की लागत, बाजार में मिलने वाली कीमत, गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) में बढ़ोतरी और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति को आधार बनाया जाएगा।
गन्ने की तौल में गड़बड़ी रोकने के भी होंगे उपाय
समिति चीनी मिलों में गन्ने की जांच और वजन दर्ज करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों के गन्ने की तौल सही तरीके से हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
इसके अलावा, मशीनों से गन्ने की कटाई करने पर किसानों के भुगतान से किसी तरह की कटौती किए जाने के मामलों की जांच की जाएगी। समिति यह भी आकलन करेगी कि मशीन से कटाई के कारण गन्ने के वास्तविक वजन में कितनी कमी आती है और इसका किसानों को मिलने वाले भुगतान पर क्या असर पड़ता है।
समिति केंद्र और राज्य सरकारों सहित संबंधित अधिकारियों के लिए सुधार के उपाय सुझाएगी। हालांकि, उसे रिपोर्ट सौंपने के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है। आदेश में कहा गया है कि समिति अपनी जांच के निष्कर्ष और कार्रवाई योग्य सुझाव जल्द से जल्द सक्षम प्राधिकारी के विचार के लिए पेश करेगी।
आठ साल से नहीं बढ़ी चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत
चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत पहली बार जून 2018 में 29 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई थी। उस समय गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 255 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बाद 2018-19 के चीनी सीजन में गन्ने का FRP बढ़ाकर 275 रुपये प्रति क्विंटल किया गया और चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत भी बढ़ाकर 31 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई।
हालांकि, इसके बाद चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अब समिति की सिफारिशों से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि गन्ना किसानों को बेहतर दाम दिलाने और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए किन नीतिगत बदलावों की जरूरत है।
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