जल शक्ति मंत्रालय के पेय जल एवं स्वच्छता विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया है। यह बैठक 1-2 सितंबर 2026 को हुए जल शिखर सम्मेलन के बाद की चर्चाओं का हिस्सा है। इस सम्मेलन का मकसद जल जीवन मिशन के दूसरे चरण और वीबी-राम जी के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करना था। सरकार के अनुसार, इस पहल का लक्ष्य ग्राम पंचायतों के नेतृत्व में सही योजना बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई को लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है। इस बैठक में केंद्र के मंत्रालयों के अलावा कई राज्यों के ग्रामीण जल आपूर्ति, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
बुनियादी ढांचों के रखरखाव पर जोर
सम्मेलन को संबोधित करते हुए पेय जल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने बताया कि जल जीवन मिशन के पहले चरण में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। अब मिशन के दूसरे चरण का पूरा ध्यान इन परिसंपत्तियों को लंबे समय तक कार्यशील और टिकाऊ बनाए रखने पर है। सरकार के अनुसार, 'वीबी-राम जी' कार्यक्रम जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और रखरखाव के लिए एक मजबूत आधार देता है।
सचिव मीणा ने साफ किया कि ग्रामीण जल प्रबंधन में ग्राम पंचायतों और स्थानीय समितियों की भूमिका सबसे केंद्रीय है, क्योंकि उन्हें अपने क्षेत्र के जल स्रोतों और स्थानीय जरूरतों की जमीनी जानकारी होती है। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे चेक डैम, रिचार्ज शाफ्ट, भूमिगत डाइक और वर्षा जल संचयन जैसे कार्यों को वैज्ञानिक आकलन के आधार पर ही चुनें। साथ ही, पेयजल स्रोतों की पहचान के लिए 'डिसीजन सपोर्ट सिस्टम' (डीएसएस) और इसरो व ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा बनाए गए 'युक्तधारा' वेब पोर्टल का पूरा उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
जल सुरक्षा के लिए 128 तरह के कामों की पहचान
ग्रामीण विकास मंत्रालय की सहायक आयुक्त दीक्षा एस. बिष्ट ने प्रस्तुति देते हुए बताया कि वीबी-राम जी कार्यक्रम के तहत जल सुरक्षा से जुड़े कुल 128 प्रकार के कार्य किए जा सकते हैं। इनमें भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और जल निकायों का पुनरुद्धार शामिल है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्यों को यह सलाह दी गई है कि वे जल-संकट वाले क्षेत्रों में इन कार्यों को प्राथमिकता दें। इस बात पर भी सहमति बनी है कि ग्राम पंचायत स्तर पर बनने वाली वार्षिक योजनाओं को ग्राम पंचायत विकास योजना प्रक्रिया के साथ अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा, ताकि एक एकीकृत योजना बनाई जा सके।
राज्यों ने अपने मॉडल-सफलता साझा कीं
इस वर्चुअल बैठक में कई राज्यों ने अपने सफल जमीनी अनुभव भी साझा किए। ओडिशा ने भूजल पुनर्भरण और पारंपरिक जल निकायों के सुधार के काम पेश किए, वहीं मध्य प्रदेश ने संचालन व रखरखाव नियम 2026 को धरातल पर उतारने की अपनी पहल की जानकारी दी। राजस्थान ने अवसंरचनाओं के रखरखाव में ग्राम पंचायतों और तकनीकी कर्मियों की भूमिका का मॉडल सामने रखा। इसके अलावा, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के उप सलाहकार श्री सुमित प्रियदर्शी की प्रस्तुति के बाद असम ने पानी की कमी वाले गांवों की पहचान के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के उपयोग का अपना अनुभव साझा किया।
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अपर सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने सम्मेलन के समापन पर इस बात पर जोर दिया कि रोजगार गारंटी योजना (वीबी-राम जी) के तहत किया जाने वाला निवेश मुख्य रूप से उन जगहों पर होना चाहिए जहां पेयजल की गंभीर चुनौती है। सरकारी निर्देशों के अनुसार, जल की कमी वाले क्षेत्रों में खर्च का असर पेयजल सुरक्षा में सुधार के रूप में साफ दिखना चाहिए।
उन्होंने राज्यों के जिला कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों से कहा कि वे मानसून के बाद जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करें और उपयुक्त योजनाएं बनाएं। सरकार की ओर से राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे नवंबर 2026 में होने वाले क्षेत्रीय सम्मेलनों में पेश करने के लिए ठोस कार्य योजनाएं तैयार करें। इस बैठक का मूल संदेश यही रहा कि केवल ढांचा खड़ा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजबूत संस्थागत समन्वय के जरिए ग्रामीण पेयजल सेवाओं को हमेशा के लिए सुरक्षित बनाना जरूरी है।