कर्नाटक में गन्ने का उचित दाम मांग रहे किसानों ने केंद्र सरकार की ओर से समिति गठित करने के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो और गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 अक्टूबर को बेलगावी के पास मुक्ति मठ में किसान नेता चुनप्पा पुजेरी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कृषि वैज्ञानिक रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति गठित करना अच्छा कदम है। समिति को चीनी और गन्ने की कीमतों से जुड़े सभी मुद्दों पर विचार करने की जिम्मेदारी दी गई है। किसानों को उम्मीद है कि समिति जल्द अपनी रिपोर्ट देगी और केंद्र सरकार उसकी सिफारिशों पर अमल करेगी। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल समिति बनाने से किसानों का आंदोलन खत्म नहीं होगा। किसानों की मांगें पूरी होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
चीनी का अलग-अलग दाम तय करे सरकार- किसान नेता
किसान नेता शशिकांत पाडासलगी गुरुजी ने कहा कि चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग से सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बाजार में चीनी की कीमतों को देखा जा सकता है, तो किसानों को उचित दाम देने में परेशानी क्यों हो रही है?
उन्होंने कहा कि सरकार घरेलू और व्यावसायिक इस्तेमाल वाले एलपीजी सिलेंडरों की कीमतें अलग-अलग रखती है। इसी तरह घरेलू उपभोक्ताओं और औद्योगिक इकाइयों के लिए चीनी की अलग-अलग कीमतें तय करने पर भी विचार किया जा सकता है। पाडासलगी ने कहा कि खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित रखने के नाम पर किसानों को गरीब बनाए रखना उचित नहीं है। किसानों की मांग है कि उन्हें गन्ने की बढ़ती लागत के अनुरूप उचित मूल्य मिले।
महाराष्ट्र के किसान भी आंदोलन में होंगे शामिल
महाराष्ट्र शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने कहा कि उनके संगठन के सदस्य कर्नाटक के किसानों के समर्थन में हुबली चलो पदयात्रा में शामिल होंगे। इसके लिए कोल्हापुर और आसपास के क्षेत्रों से किसान पहुंचेंगे। इस आंदोलन के जरिए किसान गन्ने की कीमतों में बढ़ोतरी की मांग को और मजबूती से उठाना चाहते हैं।
केंद्र सरकार की बैठक से नाराज कर्नाटक के मंत्री
कर्नाटक के सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी ने केंद्र सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। 15 अक्टूबर को चिक्कोडी में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की समस्याओं पर जिम्मेदारी से काम नहीं किया। सावदी के मुताबिक, वह 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में गन्ना किसानों और अधिकारियों के बीच हुई बैठक में कर्नाटक के गन्ना मंत्री रुद्रप्पा लामाणी के साथ शामिल हुए थे। उन्हें लगा कि केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रल्हाद जोशी सहित अन्य अधिकारी बैठक में पूरी तैयारी के साथ नहीं आए थे।
उन्होंने कहा कि बैठक से पहले केंद्र सरकार को चीनी और गन्ने के मूल्य में बदलाव की संभावना पर मंत्रिमंडल से चर्चा करनी चाहिए थी। किसानों की शिकायतें सुनने के बाद दोनों कीमतों में संशोधन पर स्पष्ट फैसला घोषित किया जाना चाहिए था। सावदी ने कहा कि बैठक में केवल समिति गठित करने, उसकी रिपोर्ट आने और उसके बाद फैसला लेने की बात कही गई। उन्हें किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के रवैये में जरूरी तत्परता नहीं दिखी। उन्होंने कहा कि गन्ना किसानों की मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए था, लेकिन बैठक में ऐसा नहीं हुआ। इससे किसान नेताओं और किसानों में निराशा है।
अब कीमतों में बढ़ोतरी पर टिकी किसानों की नजर
कर्नाटक के गन्ना किसान लंबे समय से गन्ने का उचित मूल्य बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सरकार ने उनकी समस्याओं पर विचार करने के लिए समिति बनाई है, लेकिन किसान केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। किसानों की मुख्य मांग चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 60 रुपये प्रति किलो और गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य 5,500 रुपये प्रति क्विंटल तय करना है। अब देखना होगा कि समिति की सिफारिशों के बाद केंद्र सरकार कीमतों में बदलाव पर क्या फैसला लेती है।
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