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PULSES: सरकार की दालों पर आयात शुल्क घटाने की फिलहाल कोई योजना नहीं, फसल-बफर स्टॉक से महंगाई कम करने का प्लान

गांव जंक्शन डेस्क, पटना Published by: Devesh Saraswat Updated Thu, 15 Oct 2026 02:04 PM IST
सार

  • दालों की कीमतें बढ़ीं, आयात शुल्क घटाने की फिलहाल योजना नहीं
  • सितंबर में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74% पहुंची
  • एक साल में अरहर दाल 12.7% तक महंगी हुई
  • खरीफ दालों की बुवाई का रकबा बढ़कर 12.24 मिलियन हेक्टेयर हुआ
  • उड़द और अरहर की बढ़ी बुवाई से पैदावार की उम्मीद

दालों की कीमतों में तेजी।
दालों की कीमतों में तेजी। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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दालों की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल विदेशों से आने वाली दालों पर आयात शुल्क कम करने की कोई योजना नहीं है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की सचिव निधि खरे ने बुधवार को बताया कि सरकार घरेलू फसल की अच्छी पैदावार और वैश्विक स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति के भरोसे है। खराब मानसून की चिंताओं के बावजूद, सरकार सस्ते आयात को बढ़ावा देने के बजाय खरीफ की फसल और गोदामों में रखे अपने बफर स्टॉक के सहारे कीमतों को काबू करने की रणनीति पर काम कर रही है।

वर्तमान में, सरकार मसूर और चने पर 10% आयात शुल्क वसूलती है, जबकि पीली मटर पर 30% शुल्क लागू है। वहीं, अरहर (तूर) और उड़द को 31 मार्च 2027 तक मुफ्त श्रेणी (बिना किसी आयात शुल्क के) के तहत मंगाने की छूट है। आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत ने 5.96 मिलियन टन दालों का आयात किया था, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 18% कम था। इसके बाद वित्त वर्ष 2027 (अप्रैल-जुलाई) में आयात सालाना आधार पर 62% बढ़कर 1.71 मिलियन टन हो गया है।

खाद्य महंगाई ने पकड़ी तेजी
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में खुदरा महंगाई दर अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% हो गई है। वहीं खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर 5.97% से बढ़कर 7.74% पर पहुंच गई है। 'आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25' के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर (वित्त वर्ष 25) के दौरान कुल खुदरा महंगाई में सब्जियों और दालों की हिस्सेदारी 32.3% रही।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में प्रमुख दालों की कीमतों में 12.7% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है:

दालों की कीमतों में 12.7 प्रतिशत का उछाल
14 अक्टूबर तक चना दाल की कीमत 5% बढ़कर 91.64 रुपये प्रति किलो हो गई है, जो पिछले साल 87.24 रुपये थी। अरहर 12.7% महंगी होकर 115.31 रुपये से 129.96 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है। उड़द कीमत 9.3% बढ़कर 113.99 रुपये से 124.54 रुपये प्रति किलो हो गई है। मूंग 2.8% की बढ़त के साथ 110.61 रुपये से बढ़कर 113.66 रुपये प्रति किलो बिक रही है। मसूर 1.6% की मामूली बढ़त हुई है और यह 89.50 रुपये से बढ़कर 90.93 रुपये प्रति किलो हो गई है।

बुवाई का बढ़ा हुआ रकबा देगा राहत
आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए सरकार अच्छी बुवाई पर निर्भर है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2 अक्टूबर तक खरीफ दालों की बुवाई का रकबा (क्षेत्रफल) बढ़कर 12.24 मिलियन हेक्टेयर हो गया है, जो एक साल पहले इसी समय 11.98 मिलियन हेक्टेयर था। दालों का सामान्य बुवाई क्षेत्र 12.36 मिलियन हेक्टेयर माना जाता है।

बुवाई में सबसे अधिक वृद्धि उड़द में देखी गई है, जिसका रकबा 2,96,000 हेक्टेयर बढ़कर 2.66 मिलियन हेक्टेयर हो गया है। अरहर (तूर) की बुवाई भी 1,49,000 हेक्टेयर बढ़कर 4.79 मिलियन हेक्टेयर हो गई है। हालांकि, इस दौरान मूंग की बुवाई का रकबा 1,17,000 हेक्टेयर घटकर 3.37 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। सरकार का मानना है कि अंतिम पैदावार मौसम और खेतों की स्थिति पर निर्भर करेगी, लेकिन इस बार अच्छी पैदावार की पूरी उम्मीद है।


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