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गन्ने की खेती होगी अधिक लाभकारी : ICAR -ISEC के बीच समझौता, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा, किसानों को ये फायदे...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 09 Oct 2026 12:02 PM IST
सार

  • गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए आईसीएआर और आईएसईसी के बीच समझौता
  • कोयंबटूर में गन्ने के लिए वैश्विक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होगा
  • अधिक उपज और बेहतर चीनी रिकवरी वाली किस्मों का होगा विकास
  • गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीक, मशीनीकरण और डिजिटल तरीकों को मिलेगा बढ़ावा

चीनी उद्योग के अनुभव और वैज्ञानिक ज्ञान को एक मंच पर लाएगा यह समझौता।
चीनी उद्योग के अनुभव और वैज्ञानिक ज्ञान को एक मंच पर लाएगा यह समझौता। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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गन्ने की खेती को अधिक फायदेमंद और उपज में बढ़ोतरी के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और इंडियन शुगर एक्जिम कॉर्पोरेशन के बीच एक समझौता पक्का हुआ है। इस समझौते के तहत गन्ने पर शेध, नई और उन्नत किस्मों के विकास और खेती के बेहतरीन तरीकों की खोज में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

बता दें कि इंडियन शुगर एक्जिम कॉर्पोरेशन चीनी उद्योग के दो प्रमुख संगठनों- इस्मा और राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ एक संयुक्त मंच है।   इस समझौते पर ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव और ISEC की ओर से ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने हस्ताक्षर किए।

कोयंबटूर में बनेगा वैश्विक उत्कृष्ट केंद्र, नई किस्मों का होगा विकास 
इस साझेदारी के तहत तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान में गन्ने के लिए एक ग्लोबल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। यह केंद्र वैज्ञानिक ज्ञान और चीनी उद्योग के अनुभव को एक मंच पर लाने का काम करेगा। इस केंद्र में गन्ने की नई किस्मों का विकास होगा। समझौते के तहत मौजूदा प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों को मजबूत किया जाएगा तथा टिश्यू कल्चर और जीनोमिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

नई तकनीक, मशीनीबेकरण और किसानों के लिए प्रशिक्षण
नई किस्मों के अलावा यह समझौता गन्ने की खेती मं यंत्रों के उपयोग सटीक खेती और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने पर भी फोकस करेगा। साथ ही, फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों और बीमारियों पर निगरानी व रोकथाम की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। इस योजना में वैज्ञानिकों के साथ-साथ किसानों, चीनी मिलों के प्रतिनिधियों और कृषि कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। इससे नई और बेहतर गन्ने की किस्में तेजी से किसानों के खेतों तक पहुंच सकेंगी।

गन्ना किसानों के हित के लिए अहम कदम
ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट के अनुसार, यह साझेदारी गन्ना क्षेत्र को आगे ले जाने और गन्ना किसानों की भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने नई किस्मों की जांच और बीज उत्पादन के काम में ICAR के साथ मिलकर काम करने के लिए ISMA की सराहना की।

यूपी में बेहतर गन्ना बीजों का होगा उत्पादन
ICAR के महानिदेशक ने यह भी बताया कि लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान में 6 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों के लिए गुणवत्तापूर्ण गन्ना बीज उत्पादन का उन्नत केंद्र बनाया जा रहा है, जिसमें ISMA अपना सहयोग दे रहा है।

वैज्ञानिक क्षमता और चीनी उद्योग के अनुभव किसान हित से जुड़ेंगे
ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के अनुसार, यह साझेदारी वैज्ञानिकों की क्षमता और उद्योग के अनुभव को किसानों के हित से जोड़ेगी। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय गन्ना अधिक उत्पादक, मौसम-सहनशील और टिकाऊ बनेगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी और चीनी उद्योग और मजबूत होगा।


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