गन्ने की खेती में मजदूरों की कमी और उनकी बढ़ती मजदूरी किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में आधुनिक कृषि मशीनें किसानों की लागत घटाने और समय पर खेती के काम पूरे करने में मदद कर सकती हैं। इन मशीनों की मदद से बुवाई से लेकर कटाई तक के काम कम समय में किए जा सकते हैं। इससे मजदूरों पर निर्भरता घटेगी और फसल की पैदावार व गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।
यह बात कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने पलवल के सरोली गांव में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के गन्ना अनुभाग की ओर से आयोजित किसान गोष्ठी में कही। उन्होंने किसानों को गन्ने की खेती में आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल और उनके फायदों के बारे में जानकारी दी।
एक मशीन से चार घंटे में एक एकड़ गन्ने की बुवाई
डॉ. मलिक ने बताया कि आधुनिक कटर प्लांटर मशीन से चार लोगों की मदद से करीब चार घंटे में एक एकड़ खेत में गन्ने की बुवाई की जा सकती है। ट्रैक्टर से चलने वाली यह मशीन एक ही बार में खेत में नालियां बनाने, गन्ने के बीज के टुकड़े करने, बुवाई करने और खाद व कीटनाशक डालने का काम कर सकती है। इससे बुवाई में लगने वाला समय और मजदूरों की जरूरत कम हो सकती है। किसानों को अलग-अलग कामों के लिए ज्यादा मजदूर लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
गन्ने और गेहूं की बुवाई में भी काम आएगी मशीन
कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि आरबीएस प्लांटर की मदद से गन्ने और गेहूं दोनों की बुवाई की जा सकती है। वहीं, रैटून मैनेजर और पावर वीडर जैसी मशीनें गन्ने की कटाई के बाद खेत में बची ठूंठ काटने, खरपतवार हटाने और मिट्टी को भुरभुरा बनाने में मदद करती हैं।
इन मशीनों से पौधों के आसपास मिट्टी चढ़ाने का काम भी किया जा सकता है। इसके अलावा, चौड़ी नाली बनाने वाली रिजर मशीन से गन्ने की बुवाई के दौरान पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने में मदद मिलती है।
कटाई और छिलाई में सबसे ज्यादा मजदूरों की जरूरत
डॉ. मलिक ने कहा कि गन्ने की कटाई और छिलाई में सबसे ज्यादा मजदूरों की जरूरत पड़ती है। मजदूर समय पर नहीं मिलने या मजदूरी बढ़ने से किसानों के काम में देरी होती है। इसका असर फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कंबाइन हार्वेस्टर समेत आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल कटाई के काम को आसान बना सकता है। इससे समय की बचत होगी और मजदूरों पर निर्भरता भी कम होगी।
उन्होंने किसानों को बताया कि गन्ना केवल चीनी बनाने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे गुड़, एथेनॉल, रिफाइंड चीनी और रस भी तैयार किया जाता है। इसके अवशेष का इस्तेमाल पशु चारे और बिजली उत्पादन में भी किया जाता है। इस तरह गन्ने की खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कई उद्योगों को सहारा देती है।
कृषि मशीनें खरीदने पर मिलती है सरकारी मदद
डॉ. मलिक ने बताया कि किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण खरीदने के लिए सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जाती है। किसान संबंधित कृषि विभाग से उपलब्ध योजनाओं, पात्रता और सहायता की शर्तों की जानकारी लेकर इनका लाभ उठा सकते हैं। गोष्ठी में सहायक गन्ना अधिकारी अरुण सोलंकी ने किसानों को सिंचाई के सही तरीकों और फसल को खराब होने से बचाने के उपायों के बारे में जानकारी दी।
वहीं, चीनी मिल की ओर से पहुंचे गन्ना विकास अधिकारी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि मिल के बाहर से गन्ने का बीज खरीदने वाले किसानों को 100 रुपये प्रति क्विंटल की आर्थिक सहायता दी जाएगी। किसानों के लिए जरूरी बात: गन्ने की खेती में लागत घटाने के लिए मशीनों का इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है। किसान मशीन खरीदने से पहले उसकी कीमत, खेत की जरूरत, उपलब्धता और सरकारी सहायता की शर्तों की जानकारी जरूर लें।
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