अमेरिका के आयोवा राज्य में 1890 में एक किसान को खेत में गिरा उल्कापिंड मिला था। किसान ने उसे 105 डॉलर में बेच दिया, लेकिन जमीन के मालिक ने इस पर अपना दावा ठोक दिया। मामला अदालत पहुंचा और करीब दो साल बाद राज्य के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जमीन में धंसा उल्कापिंड उसी जमीन के मालिक का है। इस मामले ने संपत्ति के अधिकार से जुड़ा एक अहम कानूनी सिद्धांत स्थापित किया।
आसमान से गिरा था उल्कापिंड, किसान ने जमीन से निकाला
यह घटना 2 मई 1890 की शाम की है। अमेरिका के आयोवा राज्य के एक खुले मैदान में आसमान से एक उल्कापिंड गिरा और जमीन में करीब तीन फीट नीचे धंस गया। अगले दिन किसान पीटर होगलैंड ने उसे खोदकर बाहर निकाला। 5 मई को उसने इसे 105 डॉलर में बेच दिया।
इस उल्कापिंड का वजन करीब 66 पाउंड यानी 30 किलोग्राम था। उस समय आसमान में आग के गोले जैसी चमक दिखाई देने की खबरें आयोवा के डेस मोइनेस से लेकर मेसन सिटी तक दर्ज की गई थीं। उल्कापिंड के फटने के बाद उसके टुकड़े कई किलोमीटर के इलाके में बिखर गए थे। अलग-अलग जगहों से इसके करीब 122 किलोग्राम टुकड़े बरामद किए गए थे।
चर्च के लिए पैसे जुटाना चाहता था किसान
उल्कापिंड की जानकारी मिलने पर मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संग्रहालय से जुड़े भूविज्ञानी होरेस वी. विंचेल उसे खरीदने पहुंचे। विंचेल ने 1923 में लिखे अपने एक लेख में बताया कि किसान और उसकी पत्नी नए चर्च में योगदान नहीं दे पाने के कारण परेशान थे। वे उल्कापिंड को अपने लिए एक तरह का उपहार मान रहे थे।
किसान ने शुरुआत में उल्कापिंड की कीमत 300 डॉलर मांगी थी। विंचेल ने 75 डॉलर की पेशकश की। इसी दौरान एक दूसरा खरीदार भी वहां पहुंच गया। दोनों के बीच कीमत को लेकर प्रतिस्पर्धा शुरू हुई और आखिरकार विंचेल ने 105 डॉलर देकर उल्कापिंड खरीद लिया। लेकिन इस सौदे में एक बड़ी बात छूट गई थी। जिस जमीन से उल्कापिंड निकाला गया था, उसका मालिक इस सौदे में शामिल ही नहीं था।
जमीन के मालिक ने ठोका दावा
जिस खेत में उल्कापिंड गिरा था, उसके मालिक जॉन गोडार्ड थे। उनके पास करीब 1857 से उस जमीन का स्वामित्व था। वर्ष 1890 में खेत की घास काटने के अधिकार दूसरे व्यक्ति जेम्स एलेकसन को दिए गए थे। किसान पीटर होगलैंड पड़ोसी था, लेकिन जमीन का मालिक नहीं था। उल्कापिंड खरीदने के बाद विंचेल उसे मिनियापोलिस भेजने की तैयारी कर रहे थे।
तभी अगले दिन सुबह एक शेरिफ ने अदालत के आदेश पर उसे जब्त कर लिया। जमीन के मालिक गोडार्ड ने उल्कापिंड पर अपना अधिकार जताया था। निचली अदालत ने गोडार्ड के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद होगलैंड को उल्कापिंड की बिक्री से मिले 105 डॉलर लौटाने पड़े।
विश्वविद्यालय ने भी लड़ी कानूनी लड़ाई
उल्कापिंड को वापस पाने के लिए विंचेल ने मिनेसोटा विश्वविद्यालय की मदद से एक और कानूनी कार्रवाई शुरू कराई। विश्वविद्यालय के वकील चार्ल्स बी. इलियट ने इसके लिए 400 डॉलर का बॉन्ड जमा किया।
विंचेल के संस्मरण के मुताबिक, इसके बाद बैंक में उल्कापिंड को लेकर खींचतान हुई। वकील उसे लेकर वहां से निकलने में सफल रहे। बताया जाता है कि बाद में उन्होंने उल्कापिंड को एक मालगाड़ी के जरिए अल्बर्ट ली तक पहुंचाया और फिर विश्वविद्यालय परिसर के पास एक खाली शेड में छिपा दिया। हालांकि, इस घटनाक्रम के कुछ विवरण विश्वविद्यालय से जुड़े पुराने लेखों और संस्मरणों पर आधारित हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
अक्टूबर 1892 में आयोवा के सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। गोडार्ड बनाम विंचेल (Goddard v. Winchell) नाम से चर्चित इस मामले में अदालत ने माना कि निजी जमीन में धंसा उल्कापिंड उस जमीन के मालिक की संपत्ति है। इसका मतलब था कि केवल उल्कापिंड को खोज लेने या जमीन से निकाल लेने भर से खोजने वाला व्यक्ति उसका कानूनी मालिक नहीं बन जाता।
हालांकि, कानूनी लड़ाई यहीं खत्म नहीं हुई। उल्कापिंड को वापस लाने के लिए जमा किए गए बॉन्ड को लेकर विश्वविद्यालय पर भी मुकदमा हुआ। विंचेल के अनुसार, जूरी ने उल्कापिंड की कीमत 480 डॉलर आंकी। यह राशि चुकाने के बाद आखिरकार उल्कापिंड मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संग्रहालय पहुंच गया।
130 साल से ज्यादा पुराना मामला आज भी क्यों अहम है?
यह मामला संपत्ति कानून के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को स्पष्ट करता है। किसी वस्तु को खोज लेना और उस पर कानूनी अधिकार होना दो अलग-अलग बातें हैं। यदि कोई उल्कापिंड निजी जमीन में आकर धंस जाता है, तो उस पर जमीन के मालिक का अधिकार हो सकता है, भले ही उसे जमीन से किसी दूसरे व्यक्ति ने निकाला हो। 1890 में शुरू हुआ यह विवाद इस बात का उदाहरण है कि प्रकृति से मिली कोई असाधारण वस्तु भी कानूनी अधिकारों और संपत्ति के नियमों के दायरे में आती है।
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