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हरियाणा में गन्ना किसानों का आंदोलन : 600 रुपये प्रति क्विंटल भाव की मांग, 12 नवंबर से ट्रैक्टर रैलियां

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 07 Nov 2026 05:48 PM IST
सार

हरियाणा में गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर किसान आंदोलन करेंगे। 12 नवंबर से ट्रैक्टर रैलियां और 2 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी गई है।

गन्ने की फसल
गन्ने की फसल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा में गन्ने के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। लेकिन किसान संगठन इस बढ़ोतरी से संतुष्ट नहीं हैं। उनकी मांग है कि गन्ने का भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, किसान संगठनों ने 12 नवंबर से राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत अलग-अलग जिलों में चीनी मिलों के बाहर ट्रैक्टर रैलियां निकाली जाएंगी। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांग नहीं मानी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

सरकार ने 2026-27 के लिए कितना तय किया गन्ने का भाव?
हरियाणा सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। वहीं, 2027-28 सीजन के लिए इसे बढ़ाकर 450 रुपये प्रति क्विंटल करने का फैसला लिया है। हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि मौजूदा सीजन में केवल 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किसानों के साथ अन्याय है।

किसानों की मांग है कि उन्हें इसी सीजन से 600 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया जाए। उनका कहना है कि चीनी और इथेनॉल उद्योग को बढ़ती कीमतों का फायदा मिल रहा है, लेकिन गन्ना किसानों को उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा है।

12 से 27 नवंबर तक चीनी मिलों के बाहर ट्रैक्टर रैलियां
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के बैनर तले शुक्रवार को करनाल जिले के मंगलोरा गांव में किसानों की बैठक हुई। इसमें गन्ने का भाव बढ़ाने के लिए अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता किसान नेता जसविंदर मंगलोरा ने की। एसकेएम सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के हरियाणा अध्यक्ष रतन मान ने कहा कि जब तक सरकार गन्ने का भाव बढ़ाने पर सहमत नहीं होती, तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा।

बीकेयू प्रवक्ता सुरेंद्र सांगवान के मुताबिक, आंदोलन के पहले चरण में 12 से 27 नवंबर के बीच सोनीपत, करनाल, यमुनानगर, नारायणगढ़, जींद, रोहतक और इंद्री में चीनी मिलों के बाहर ट्रैक्टर रैलियां निकाली जाएंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए तो 2 दिसंबर को किसान कुरुक्षेत्र में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस दौरान किसानों की एक बड़ी बैठक भी होगी।

70 रुपये किलो चीनी, फिर भी किसानों को नहीं मिल रहा उचित दाम
किसान नेता रतन मान का कहना है कि गन्ना किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि चीनी और इथेनॉल उद्योग मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को गन्ने का भाव करीब 4.15 रुपये प्रति किलो मिल रहा है, जबकि चीनी की कीमत बढ़कर 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि गन्ने का उचित दाम नहीं मिलने के कारण किसान धीरे-धीरे इसकी खेती से दूरी बना रहे हैं।

एक एकड़ गन्ने की खेती पर 90 हजार रुपये तक खर्च
किसान नेता जसविंदर मंगलोरा ने कहा कि गन्ना सालभर की फसल है। इसकी खेती में किसानों को लंबे समय तक मेहनत और पैसा लगाना पड़ता है। खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी और सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि किसानों को एक एकड़ गन्ने की खेती पर करीब 80 हजार से 90 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। ऐसे में सरकार की ओर से तय मौजूदा भाव किसानों की लागत और उनकी मेहनत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।

15 दिसंबर को रैली, मांग नहीं मानी तो गन्ने की कटाई रोकेंगे किसान
दूसरी ओर, भारतीय किसान यूनियन (चारुनी) ने भी गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने बताया कि संगठन 15 दिसंबर को रैली निकालेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने किसानों की मांग नहीं मानी तो 2 जनवरी 2027 से किसान गन्ने की कटाई बंद कर देंगे।

 
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