कर्नाटक में गन्ना किसानों ने अपनी मांगों की जांच के लिए केंद्र सरकार द्वारा चार सदस्यीय समिति गठित करने के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक केंद्र सरकार गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाने की ठोस घोषणा नहीं करती, तब तक उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।
इस बीच, मुंबई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर स्थित कोग्नोली टोल प्लाजा पर किसानों के चल रहे धरने की वजह से वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है, जिसके चलते महाराष्ट्र पुलिस ने वाहन चालकों को वैकल्पिक रास्तों से जाने की सलाह दी है।
किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारी किसान गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) वर्तमान ₹3,650 प्रति टन से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति टन करने और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) बढ़ाकर ₹60 प्रति किलोग्राम करने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा किसानों की कई मांगें हैं, जिनमें चीनी मिलों में गन्ने के वजन और चीनी की रिकवरी की जांच में पूरी पारदर्शिता बरती जाए, तथा सरकारी देखरेख में कंप्यूटराइज्ड कांटे लगाए जाएं, कर्नाटक में गन्ने और मक्के से बनने वाले एथेनॉल की सरकारी खरीद को बढ़ाना आदि शामिल हैं।
कमेटी का स्वागत, लेकिन आंदोलन रहेगा जारी
कर्नाटक राज्य रैयत संघ (KRRS) और हसीरु सेने से जुड़े किसान नेता चुनप्पा पुजेरी ने 15 अक्टूबर को बेलगावी के पास मुक्ति मठी में कहा कि किसान कृषि वैज्ञानिक रमेश चंद की अध्यक्षता में बनी कमेटी का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि समिति में सभी पक्षों का प्रतिनिधित्व है और उम्मीद है कि वह जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, लेकिन केवल कमेटी बन जाने से आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। जब तक सरकार दरों में संशोधन नहीं करती, तब तक धरना जारी रहेगा।
वहीं, किसान नेता शशिकांत पडसलगी गुरुजी ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, "क्या सरकार घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अलग-अलग दरों पर नहीं बेचती? फिर आम लोगों के खाने वाली चीनी और बड़ी कंपनियों द्वारा खरीदी जाने वाली चीनी के अलग-अलग दाम क्यों तय नहीं किए जा सकते? महंगाई रोकने के नाम पर किसानों को गरीब क्यों रखा जा रहा है?"
उधर, महाराष्ट्र शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने भी कर्नाटक के किसानों को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि उनके संगठन के कार्यकर्ता कोल्हापुर और आसपास के क्षेत्रों से 'हुबली चलो पदयात्रा' में शामिल होंगे।
कर्नाटक के मंत्री ने केंद्र पर उठाए सवाल
कर्नाटक के सहकारिता मंत्री लक्ष्मण सावदी ने किसानों की मांगों पर केंद्र सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है। 15 अक्टूबर को चिक्कोडी में पत्रकारों से बात करते हुए सावदी ने कहा कि 12 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों शिवराज सिंह चौहान और प्रल्हाद जोशी के साथ किसानों की बैठक हुई थी, जिसमें केंद्रीय मंत्री बिना किसी स्पष्ट तैयारी के पहुंचे थे।
सावदी (जो राज्य के चीनी मंत्री रुद्रप्पा लमानी के साथ बैठक में शामिल थे) के मुताबिक, बैठक में कोई तत्काल फैसला नहीं हुआ और केंद्र ने एक हफ्ते में कमेटी बनाने तथा एक महीने में रिपोर्ट लेने की बात कही। सावदी ने कहा कि केंद्र सरकार में इस मामले को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं दिखी और किसानों की समस्याओं पर उनका रवैया निराशाजनक था।
कोग्नोली टोल प्लाजा पर एनएच-48 का ट्रैफिक प्रभावित
कोग्नोली टोल प्लाजा पर चल रहे इस प्रदर्शन की वजह से बुधवार, 14 अक्टूबर की सुबह से ही राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर यातायात बाधित है, जिससे बेलगावी और बेंगलुरु की तरफ जाने वाले वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। यह हाईवे मुंबई और पुणे को दक्षिण भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों से जोड़ता है।
महाराष्ट्र हाईवे पुलिस ने बुधवार को जारी एक एडवाइजरी में बताया कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और लोगों को जब तक संभव हो इस रास्ते से बचने की सलाह दी गई है। कोल्हापुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) रंजन कुमार शर्मा ने यात्रियों से अपील की है कि वे सातारा, सांगली और कोल्हापुर जिलों से होकर जाने वाले वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें। दूसरी तरफ, किसानों ने दोहराया है कि जब तक कीमतों में बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं होती, चक्का जाम जारी रहेगा।