तेलंगाना सरकार ने अल नीनो के प्रभाव और अगले 8 से 10 महीनों में सामने आने वाली संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष कार्ययोजना (एक्शन प्लान) तैयार की है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे आने वाले रबी सीजन में धान की बुवाई कम करें और उपलब्ध पानी का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करें।
जलाशयों में पानी की भारी किल्लत, 24,000 गांवों में पेयजल की चुनौती
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में बारिश में 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके चलते कृष्णा बेसिन में पानी का स्तर 72 प्रतिशत और गोदावरी बेसिन में 40 प्रतिशत तक घट गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य को 460 टीएमसी (TMC) पानी की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 209 टीएमसी पानी ही उपलब्ध है और जलाशय खाली होने की कगार पर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, "सब कुछ खरीदा जा सकता है, लेकिन पानी नहीं खरीदा जा सकता।" उन्होंने लोगों से पानी बचाने की अपील करते हुए कहा कि उपलब्ध पानी को पीने के लिए सुरक्षित रखें और इसे गाड़ियां धोने जैसे कामों में बर्बाद न करें। राज्य के 24,000 गांवों में पीने के पानी की आपूर्ति करना एक बड़ी चुनौती है, इसलिए पेयजल को पहली प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
धान की खेती को लेकर किसानों को चेतावनी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी केवल धान की नर्सरी (पौध) तैयार करने लायक ही हो सकता है। उन्होंने किसानों को आगाह किया कि वे किसी के बहकावे में आकर बड़े पैमाने पर धान की खेती न करें, क्योंकि पानी की कमी से फसल नर्सरी स्तर पर ही सूख सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 10 लाख एकड़ में फसलों के नुकसान की आशंका जताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में खड़ी फसलें सूखने न पाएं। इसके अलावा, किसानों को मॉनसून के दौरान भी कम पानी लेने वाली फसलें उगाने की सलाह दी गई है।
बिजली की मांग 20,000 मेगावाट के पार पहुंची
बिजली क्षेत्र पर बढ़ते दबाव का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि अक्टूबर के महीने में जहां बिजली की मांग करीब 15,000 मेगावाट रहने का अनुमान था, वह बढ़कर 20,000 मेगावाट तक पहुंच गई है। गुरुवार को बिजली की खपत 20,003 मेगावाट दर्ज की गई, क्योंकि राज्य के सभी 30 लाख कृषि पंप सेट चल रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 20 दिनों में फसलों की कटाई शुरू होने वाली है। ऐसे में खड़ी फसलों को सूखने से बचाने के लिए सरकार बाजार से मौजूदा दरों पर अतिरिक्त बिजली खरीद रही है। उन्होंने किसानों और अन्य उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने के लिए उप-मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और बिजली विभाग के अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 13 वर्षों में बिजली की मांग 14,000 मेगावाट और पिछले दो वर्षों में ही 6,000 से 7,000 मेगावाट बढ़ी है। इसके अलावा पड़ोसी राज्य कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र भी बिजली संकट का सामना कर रहे हैं।
केंद्र से मदद और सहयोग की अपील
मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार ने दिन में हुई एक बैठक के दौरान इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिलने वाली जरूरी सहायता पर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा कि आने वाले संकट से निपटने के लिए जल संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण है और इसके लिए उन्होंने किसानों से सरकार का पूरा सहयोग करने की अपील की है।