विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Sugar Production May Decline Due To Drought Estimated To Be 28 Million Tonnes This Season

Sugar Production: सूखे की मार से घट सकता है चीनी उत्पादन, इस सीजन 2.8 करोड़ टन रहने का अनुमान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 17 Oct 2026 12:54 PM IST
सार

  • चीनी वर्ष 2026-27 में देश का शुद्ध उत्पादन 3.1 करोड़ टन से घटकर 2.8 करोड़ टन रह सकता है।
  • महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और कर्नाटक के कुछ इलाकों में गन्ने की फसल प्रभावित होने की आशंका।
  • देश में चीनी की खपत 2.85 से 2.9 करोड़ टन रहने का अनुमान।
  • नए सीजन की शुरुआत में मिलों के पास 35 से 36 लाख टन चीनी बचने का अनुमान, जो एक दशक से अधिक समय का निचला स्तर है।

चीनी
चीनी - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ इलाकों में कम बारिश का असर गन्ने की फसल पर पड़ने की आशंका है। इससे चीनी उत्पादन में गिरावट आ सकती है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, चीनी वर्ष 2026-27 में देश का शुद्ध चीनी उत्पादन घटकर करीब 2.8 करोड़ टन रह सकता है, जबकि पिछले सीजन में यह 3.1 करोड़ टन था। इस बार गन्ने से बनने वाली चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में नहीं किए जाने की संभावना है। ऐसे में कुल और शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग बराबर रहने का अनुमान है।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने फाइनेंशियल एक्सप्रेस को बताया कि पिछले सीजन में 3.1 करोड़ टन चीनी का उत्पादन हुआ था। इसमें से करीब 30 लाख टन चीनी इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल की गई थी। इस बार चीनी को इथेनॉल उत्पादन के लिए दूसरी ओर भेजने की योजना नहीं है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में फसल पर असर की आशंका
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में कम बारिश के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। हालांकि, उत्पादन पर मौसम के असर का सही अनुमान गन्ने की कटाई शुरू होने के बाद ही लग सकेगा। बल्लानी के मुताबिक, अगले 10 से 15 दिनों में गन्ने की पैदावार का आकलन किया जाएगा। इससे उत्पादन में संभावित गिरावट का बेहतर अंदाजा मिल सकेगा।

चीनी की खपत 2.85 से 2.9 करोड़ टन रहने का अनुमान
उद्योग के अनुमान के अनुसार, चीनी वर्ष 2026-27 में देश में चीनी की खपत 2.85 करोड़ से 2.9 करोड़ टन के बीच रह सकती है। ऐसे में उत्पादन और खपत के बीच अंतर रहने की आशंका है।

सरकार बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए इथेनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल पर रोक लगाने से जुड़े कदम उठा सकती है। इसके तहत गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से जैव ईंधन बनाने के लिए चीनी मिलों की आपूर्ति को सीमित किया जा सकता है।

एक दशक से अधिक समय के निचले स्तर पर शुरुआती स्टॉक
उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नए चीनी सीजन की शुरुआत में चीनी मिलों के पास बचा हुआ शुरुआती स्टॉक घटकर 35 से 36 लाख टन रह गया है। यह एक दशक से भी अधिक समय का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है। कम उत्पादन के कारण स्टॉक में गिरावट आई है।

इस बीच, उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ के अनुसार, शुक्रवार को चीनी का औसत खुदरा भाव 57.82 रुपये प्रति किलो रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 24 फीसदी अधिक है। हालांकि, एक महीने पहले की तुलना में कीमतों में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई है। एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में अगले दो सप्ताह के दौरान गन्ने की पेराई तेज होने पर चीनी के दाम घटकर 52 रुपये प्रति किलो तक आ सकते हैं।

जरूरत पड़ने पर 10 लाख टन चीनी का आयात संभव
अगस्त में चीनी की कीमतों में तेजी के बाद सरकार ने घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए ब्राजील से 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घरेलू बाजार से अधिक होने के कारण अब तक आयात बहुत कम हुआ है।

बल्लानी के अनुसार, महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई शुरू होने से कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है। हालांकि, अगले साल जून-जुलाई तक चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कम से कम 10 लाख टन चीनी का आयात करना पड़ सकता है।

त्योहारों के लिए बिक्री की अतिरिक्त अनुमति
त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने मिलों को अक्टूबर में उत्पादित चीनी को अक्टूबर या नवंबर में बेचने की अनुमति दी है। यह बिक्री इन दोनों महीनों के नियमित मासिक कोटे के अतिरिक्त होगी।

खाद्य मंत्रालय के अनुसार, यदि कोई मिल अक्टूबर में 1,000 टन चीनी बनाती है, तो वह इस मात्रा को अक्टूबर या नवंबर में बेच सकती है। इसके अलावा, अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन और दूसरे पखवाड़े के लिए 14 लाख टन चीनी की बिक्री का कोटा तय किया गया है।

इथेनॉल उत्पादन में चीनी का इस्तेमाल बढ़ा
क्रिसिल के विश्लेषण के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में इथेनॉल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी की मात्रा तेजी से बढ़ी है। चीनी वर्ष 2019-20 में जहां इसके लिए 8 लाख टन चीनी का इस्तेमाल हुआ था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर करीब 30 लाख टन हो गया। यानी पांच वर्षों में इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का इस्तेमाल लगभग चार गुना बढ़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन