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Home› Khabar Junction› Arhar Pigeon Pea Acreage Has Increased Yet Production Is Projected To Decline Will It Fall Short Of The Gov

अरहर का रकबा बढ़ा, फिर भी उत्पादन घटने का अनुमान : सरकारी लक्ष्य से रहेगा पीछे? नए देश से खरीद का प्लान...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 03 Nov 2026 08:33 AM IST
सार

  • खरीफ 2026 में अरहर का उत्पादन सरकारी लक्ष्य 40 लाख टन के मुकाबले घटकर 20 से 25 लाख टन रहने का अनुमान।
  • कर्नाटक और महाराष्ट्र समेत प्रमुख उत्पादक राज्यों में सूखे और मिट्टी में नमी की कमी से फसल को नुकसान।
  • अरहर की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले 2.83 फीसदी बढ़कर 47.25 लाख हेक्टेयर हुआ।
  • उत्पादन में गिरावट की आशंका के बीच मांग पूरी करने के लिए 10 से 12 लाख टन अरहर आयात होने का अनुमान।
  • म्यांमार, अफ्रीकी देशों और ब्राजील से अरहर की सप्लाई पर रहेगी निर्भरता, कुल उपलब्धता 40 से 50 लाख टन रहने की उम्मीद।

अरहर उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान।
अरहर उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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खरीफ 2026 के लिए भारत में अरहर का उत्पादन 20 से 25 लाख टन के बीच रहने की संभावना है। यह व्यापार और उद्योग जगत का अनुमान है, जो 40 लाख टन के सरकारी उत्पादन लक्ष्य से काफी कम। उत्पादन में इस बड़ी गिरावट का कारण कर्नाटक और महाराष्ट्र के साथ-साथ गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में पड़ा सूखा है, जिसने खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है।

बुवाई का रकबा बढ़ा, लेकिन नमी की कमी ने बढ़ाई चिंता
जानकारों के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल बुवाई का रकबा थोड़ा बढ़ा है, लेकिन सीजन के अंत में खेतों में नमी की कमी के कारण पैदावार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, खरीफ 2026 के दौरान अरहर की बुवाई 47.25 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 45.95 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 2.83 प्रतिशत अधिक है। उपाध्याय के मुताबिक, अगर उत्पादन उद्योग के अनुमान के करीब रहता है, तो मांग पूरी करने के लिए आयात और पुराने स्टॉक पर निर्भर रहना बहुत जरूरी हो जाएगा।

खपत के बराबर बनी रहेगी कुल सप्लाई
भारत में अरहर की सालाना खपत 40 लाख टन से 45 लाख टन के बीच आंकी जाती है। सतीश उपाध्याय ने कहा कि भले ही उत्पादन में कमी का अनुमान है, लेकिन देश में अरहर की कुल सप्लाई 40 से 50 लाख टन के बीच रहने की उम्मीद है, जो देश की जरूरत को आसानी से पूरा कर लेगी। इस साल 10 से 12 लाख टन अरहर का आयात होने की संभावना है। इसके अलावा, सरकार के पास 8 से 10 लाख टन का सुरक्षित भंडार (बफर स्टॉक) रहने की उम्मीद है, जबकि व्यापारियों और मिलों के पास 2 से 3 लाख टन का निजी स्टॉक होने का अनुमान है।

विदेशी बाजारों से आयात का गणित
देश की मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से दाल मंगाई जाएगी। म्यांमार से 3.25 से 3.5 लाख टन अरहर आने का अनुमान है। वहीं, अफ्रीकी देशों में भी फसल उम्मीद से कम होने के कारण वहां से लगभग 8 से 10 लाख टन सप्लाई मिलने की संभावना है। उपाध्याय ने बताया कि इस साल दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील एक नए सप्लायर के रूप में उभरा है। मार्च तक ब्राजील से 10,000 से 20,000 टन अरहर आने की उम्मीद है।

मौसम की मार और कमजोर मानसून का असर
बुवाई और फसल की स्थिति पर बात करते हुए सतीश उपाध्याय ने बताया कि जून महीने में मानसून की कमजोर बारिश के कारण शुरुआती बुवाई में देरी हुई। हालांकि, जुलाई में अच्छी बारिश से स्थिति में कुछ सुधार हुआ और किसानों को राहत मिली। लेकिन इसके बाद, महाराष्ट्र और कर्नाटक में असमान बारिश और सूखे के लंबे दौर के चलते मिट्टी में नमी की भारी कमी हो गई, जिससे देर से होने वाली बुवाई भी धीमी पड़ गई।

फसल के विकास और अंतिम पैदावार पर मंडराता खतरा
सीजन के आखिरी दौर में बारिश न होने और सूखे का असर फसल के विकास पर पड़ सकता है, खासकर उस समय जब पौधों में फलियां बन रही होती हैं। उपाध्याय ने साफ किया कि इससे उत्पादन और दाने की गुणवत्ता दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मौसम साथ न दे, तो बुवाई का रकबा ज्यादा होने के बावजूद पैदावार कम हो सकती है। हालांकि, वास्तविक पैदावार कितनी होगी, यह खेतों में होने वाली फसल कटाई के अंतिम नतीजों पर ही निर्भर करेगा।


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