खेती-बाड़ी के नजरिए से प्रमुख पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की सिंचाई जरूरत को पूरी करने में भाखड़ा बांध अहम भूमिका निभाता है। लेकिन, कम मानसूनी बारिश की वजह से बांध का जल स्तर पांच साल के सबसे निचले स्तर पर लुढ़क गया है। आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल में मानसून सीजन के दौरान सामान्य से 11 प्रतिशथ कम बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर 1977 के बाद दूसरी बार पहाड़ों पर बर्फ पिघलने की रफ्तार कमजोर रहने से बांध के जलस्तर पर खराब असर पड़ा है। भाखड़ा बांध का जलस्तर पिछले साल की तुलना में 35.12 फीट नीचे आ गया है और वर्तमान में इसका लाइव स्टोरेज घटकर 67 फीसदी रह गया है।
गर्मियों में जल संकट का खतरा, बिजली उत्पादन भी हो सकता है प्रभावित
भाखड़ा बांध से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को पानी की आपूर्ति की जाती है। जलस्तर में आई इस भारी कमी को देखते हुए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड ने चारों राज्यों को पानी का दुरुपयोग न करने और जरूरत के मुताबिक ही इसका इस्तेमाल करने को कहा है। मानसून सीजन में बांध का स्तर कम रहने के कारण आने वाली गर्मियों में इन राज्यों में गंभीर जल संकट पैदा होने का खतरा है, साथ ही पनबिजली उत्पादन पर भी इसका असर पड़ सकता है।
भाखड़ा बांध में हिमाचल से निकलने वाली सतलुज और ब्यास नदियों का पानी आता है। इस बार पानी की उपलब्धता पर दोहरी मार पड़ी है—एक तरफ मानसून कमजोर रहा और दूसरी तरफ ग्लेशियरों से बर्फ पिघलने के बाद आने वाला पानी भी सामान्य से कम रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश से मानसून विदा हो जाएगा, जिससे अब बांधों में और अधिक बारिश का पानी पहुंचने की संभावना भी बेहद कम है।
पौंग और रणजीत सागर बांध में भी गिरावट, पानी की आवक आधी रह गई
भाखड़ा के साथ-साथ क्षेत्र के अन्य प्रमुख जलाशयों—पौंग बांध और रणजीत सागर में भी इस बार जलस्तर काफी कम है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, पौंग बांध में 30 सितंबर को जलस्तर 1,367 फीट दर्ज किया गया, जो पिछले साल के 1,389.30 फीट के मुकाबले 22.30 फीट नीचे है। पौंग बांध का लाइव स्टोरेज घटकर 73 फीसदी रह गया है, जबकि पिछले साल यह 99 फीसदी तक पहुंच गया था।
जलाशयों में पानी की दैनिक आवक में भी भारी कमी देखी गई है। 30 सितंबर को पौंग बांध में पानी की आवक 5,508 क्यूसेक रही, जबकि पिछले साल इसी दिन 9,778 क्यूसेक दर्ज की गई थी। इसी प्रकार पंडोह में भी पानी की आवक घटकर 4,619 क्यूसेक रह गई है, जो पिछले वर्ष समान अवधि में 8,758 क्यूसेक थी।
साल 2026 का मानसून सीजन पंजाब के लिए 2000 के बाद तीसरा सबसे कमजोर मानसून रहा। प्रदेश में सामान्य के मुकाबले मात्र 38 प्रतिशत कम बादल बरसे। इस कम बारिश ने खरीफ फसलों के साथ आगामी रबी सीजन को लेकर भी चिंता खड़ी की है।