ऊंचे पहाड़ों के बीच अब तक बंजर पड़ी जमीन पर मिट्टी के नीचे केसर के 90 हजार कंद लगाए गए हैं। लद्दाख में पहली बार करीब 4,000 वर्गमीटर क्षेत्र में ईरानी केसर की खेती का प्रयोग किया गया है। अब किसानों और कृषि विशेषज्ञों को पहली फसल का इंतजार है। प्रयोग सफल रहा तो बंजर जमीन को खेती योग्य बनाने के साथ किसानों के लिए आय का नया रास्ता खुल सकता है।
4,000 वर्गमीटर में लगाए 90 हजार कंद
स्पितुक फारका के कमांड एरिया में गेट नंबर-27 के पास करीब 4,000 वर्गमीटर जमीन पर 90 हजार ईरानी केसर के कंद लगाए गए हैं। इनका कुल वजन करीब 800 किलो है। प्रति वर्गमीटर औसतन 22-23 कंद लगाए गए हैं।
कंदों के चयन में भी सावधानी बरती गई। खेती के लिए 8 से 10 सेंटीमीटर परिधि, 2.5 से 3 सेंटीमीटर या इससे अधिक व्यास और कम से कम 10 ग्राम वजन वाले कंद चुने गए हैं। अभी यह प्रयोग पायलट स्तर पर है। पहली फसल से पता चलेगा कि लद्दाख की ऊंचाई, तापमान, मिट्टी और पानी की स्थिति में केसर कितना अच्छा उत्पादन देता है।
नहर से पहुंचाया पानी
केसर की खेती के लिए बंजर जमीन तक पानी पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। यह क्षेत्र लेह में करीब 800 एकड़ बंजर जमीन को फिर से उपयोगी बनाने की परियोजना का हिस्सा है। इसके लिए इगू-पेई सिंचाई नहर को चालू किया गया और अतिरिक्त पानी को बंजर क्षेत्र की ओर मोड़ा गया। इससे मिट्टी में नमी बढ़ी और खेती की संभावना बनी। इसी क्षेत्र में हिम सरोवर परियोजना के तहत चार जलाशय भी बनाए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 2.4 करोड़ लीटर है।
कश्मीर के बाद लद्दाख में केसर की उम्मीद
भारत में केसर उत्पादन का बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर से आता है। अब पहली बार लद्दाख के ठंडे और ऊंचाई वाले इलाके में इस महंगी फसल को आजमाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल है कि यहां के मौसम और मिट्टी में केसर की पैदावार और गुणवत्ता कैसी रहती है। अगर परिणाम अच्छे रहे तो इस प्रयोग को दूसरे इलाकों तक बढ़ाया जा सकता है।
बंजर जमीन से आय का नया रास्ता
अभी खेतों में सिर्फ कंद हैं और किसान पहली फसल का इंतजार कर रहे हैं। प्रयोग सफल होने पर बंजर जमीन को खेती के लिए इस्तेमाल करने और किसानों की आय के नए अवसर पैदा करने की संभावनाएं बढ़ेंगी। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के अनुसार, लद्दाख की ऊंचाई और विशेष जलवायु में केसर जैसी महंगी फसल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की क्षमता रखती है। बंजर जमीन को उपयोगी बनाना और किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार करना इस पहल का उद्देश्य है।
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