केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि केंद्र सरकार सभी किसानों के लिए बेहतर आय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लगातार काम कर रही है। शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के शुभारंभ और इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि यह पहल महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित होने के कारण खास महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी-स्वराज और जय जवान, जय किसान के विचारों ने किसानों को देश के विकास के केंद्र में रखा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अनुसार, गांधीजी और शास्त्रीजी जैसे महान नेताओं ने किसानों के कल्याण के बारे में सोचा, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी ने कई पहलों की नींव रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम-किसान योजना और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करके इस दिशा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि वैश्विक संघर्षों और आपूर्ति में रुकावटों के बावजूद यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े।
यूरिया सब्सिडी से लेकर पीएम कुसुम योजना तक का जिक्र किया
वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की एक बोरी की कीमत करीब 3,000 रुपये है, जबकि भारत में किसानों को यह लगभग 300 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है, क्योंकि केंद्र सरकार प्रत्येक बोरी पर 2,700 रुपये की सब्सिडी खुद वहन करती है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने जलवायु-अनुकूल फसलों की किस्में शुरू की हैं। वहीं बायोगैस उत्पादन के लिए गोवर्धन और सोलर कृषि पंपों के लिए पीएम-कुसुम जैसी योजनाएं लागू की हैं। साथ ही, केंद्र और राज्य मिलकर मत्स्य पालन (एक्वाकल्चर) और पशुपालन को भी सहायता दे रहे हैं। उन्होंने रिलायंस द्वारा स्थापित किए जा रहे इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की तर्ज पर विकसित होकर किसानों को मजबूत तकनीकी सहयोग देगा।
रायलसीमा बनेगा वैश्विक बागवानी केंद्र, 1 लाख करोड़ का होगा निवेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सहयोग से सूखाग्रस्त रायलसीमा को 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश के साथ ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए 40,000 करोड़ रुपये का निवेश केंद्र के सहयोग से और 60,000 करोड़ रुपये का निवेश निजी क्षेत्र के माध्यम से जुटाने की योजना है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह कार्यक्रम पूर्ववर्ती प्रकाशम जिले और रायलसीमा सहित 10 जिलों के 201 क्लस्टरों में फैले 5,860 गांवों को कवर करेगा। इस परियोजना के जरिए बागवानी फसलों की खेती का रकबा 6 लाख एकड़ अतिरिक्त बढ़ाया जाएगा।
अर्थव्यवस्था में एक लाख करोड़ की वृद्धि और विविध फसलों का दायरा
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बताया कि प्राथमिक क्षेत्र के विकास में बागवानी पहले से ही अहम भूमिका निभा रही है, जिससे सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का योगदान मिल रहा है। इस नए ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के स्थापित होने से जीवीए में 1 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायलसीमा के लोगों को सिंचाई की सुविधा दीजिए और वे सोना उगाएंगे। विपणन के माध्यम से वे धन का सृजन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सेब और स्ट्रॉबेरी से लेकर केला, एवोकाडो, कीवी और खजूर जैसी विविध फसलों की खेती की व्यापक क्षमता मौजूद है।