महाराष्ट्र के बीड जिले में सूखे को देखते हुए प्रशासन ने चारे की उपलब्धता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। औसत से कम बारिश होने के चलते जिले में खरीफ सीजन का ट्रिगर-1 लागू कर दिया गया है। प्रशासन के आकलन के अनुसार, बीड में उपलब्ध चारे का मौजूदा भंडार मात्र अगले दो महीनों तक ही चल पाएगा। इस संभावित संकट को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने गुरुवार से बीड से दूसरे जिलों में चारा ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। हाल ही में खबर सामने आई थी कि चारे और पानी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मराठवाडा के कई किसान कम दाम पर अपने पशुओं को बेचने क लिए पशु मंडी पहुंच रहे हैं।
दिसंबर से बढ़ सकती है किल्लत
बीड जिला प्रशासन के अनुसार, सामान्य से कम वर्षा के कारण आने वाले दिनों में पशुओं के लिए चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। मौजूदा समय में जिले में लगभग 1.92 लाख मीट्रिक टन चारा उपलब्ध है, जो स्थानीय मवेशियों की जरूरतों के हिसाब से मुश्किल से दो महीने के लिए ही पर्याप्त माना जाद रहा है।
दिसंबर और उसके बाद के महीनों में चारे की कमी और अधिक गहराने की आशंका है। इसी वजह से प्रशासन ने यह कदम उठाया है ताकि उपलब्ध चारे को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखा जा सके और अगले दो महीनों तक जिले के भीतर मवेशियों के लिए चारा आसानी से मिलता रहे।
हरे-सूखे दोनों तरह के चारे पर रोक
जिले में चारे के गंभीर संकट को टालने के उद्देश्य से जिलाधिकारी विवेक जॉनसन ने आधिकारिक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत जिले में उत्पादित और वर्तमान में उपलब्ध हरे तथा सूखे दोनों प्रकार के चारे को बीड की सीमा से बाहर ले जाने पर सख्त रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जिले से बाहर चारे की आवाजाही पर रोक लगाने से स्थानीय पशुपालकों को बड़ी राहत मिलेगी और सूखे की इस कठिन परिस्थिति में मवेशियों के भरण-पोषण के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।