झारखंड में खरीफ 2026 के लिए चल रहे डिजिटल फसल सर्वे का काम बहुत सुस्त रफ्तार से चल रहा है। 17 अक्टूबर तक कुल लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 38.80 प्रतिशत खेतों का ही सर्वे हो पाया है। इस सुस्त रफ्तार को देखते हुए कृषि विभाग ने चिंता जताई है और बचे हुए काम को हर हाल में 31 अक्टूबर तक पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
लाखों खेतों का सर्वे और पास होना बाकी
राज्य में कुल 26,07,544 खेतों (प्लॉट) का सर्वे करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक केवल 10,11,834 खेतों का ही ऑनलाइन सर्वे दर्ज हो सका है। इसके अलावा, सर्वे के बाद उसे ऑनलाइन पास (अप्रूवल) करने का काम भी बहुत धीमा है। अब तक सिर्फ 19.77 प्रतिशत यानी 5,15,628 प्लॉट ही अप्रूव हो सके हैं। राज्य में 34,303 पंजीकृत सर्वेयर काम में लगे हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर काम काफी पीछे है।
अधिकारियों को मिले सख्त निर्देश
काम की इस धीमी गति पर सख्ती दिखाते हुए 'समेति' (SAMETI) के निदेशक और नोडल अधिकारी रामशंकर प्रसाद सिंह ने 15 अक्टूबर को सभी जिला कृषि अधिकारियों को एक पत्र भेजा है। सरकारी निर्देश के अनुसार, खरीफ 2026 के सर्वे की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दी गई है और इसके बाद कोई समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने इलाकों में पर्याप्त सर्वेयर और सुपरवाइजर लगाएं और रोज के काम की कड़ी निगरानी करें।
कई जिलों का प्रदर्शन बेहद खराब
राज्य के 17 जिलों में आधे से भी कम काम हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे खराब स्थिति पश्चिमी सिंहभूम (15.47%), खूंटी (14.76%) और दुमका (21.18%) की है। राजधानी रांची में भी सिर्फ 30.29 प्रतिशत सर्वे ही हो सका है। वहीं, कुछ जिलों ने अच्छा काम किया है। लोहरदगा जिला 80.29 प्रतिशत काम के साथ सबसे आगे है। इसके बाद देवघर (76.82%) और हजारीबाग (64.93%) का नंबर आता है।