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Home› Khabar Junction› Sluggish Pace Of Digital Crop Survey In Jharkhand Only 39 Of Fields Surveyed Govt Issues A Strict Ultimatum

झारखंड में डिजिटल फसल सर्वे की सुस्त रफ्तार : सिर्फ 39% खेतों का सर्वे पूरा, सरकार ने दिया सख्त अल्टीमेटम...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 19 Oct 2026 12:58 PM IST
सार

  • झारखंड में खरीफ 2026 के डिजिटल फसल सर्वे का सिर्फ 38.80 फीसदी काम पूरा
  • 26.07 लाख खेतों के लक्ष्य में अब तक 10.11 लाख का सर्वे दर्ज
  • सर्वे के बाद केवल 19.77 फीसदी खेतों को मिला ऑनलाइन अप्रूवल
  • कृषि विभाग ने 31 अक्टूबर तक सर्वे पूरा करने के दिए सख्त निर्देश
  • लोहरदगा 80.29 फीसदी सर्वे के साथ सबसे आगे, खूंटी में सबसे कम काम

झारखंड में डिजिटल फसल सर्वे की सुस्त रफ्तार
झारखंड में डिजिटल फसल सर्वे की सुस्त रफ्तार - फोटो : AI Image
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विस्तार
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झारखंड में खरीफ 2026 के लिए चल रहे डिजिटल फसल सर्वे का काम बहुत सुस्त रफ्तार से चल रहा है। 17 अक्टूबर तक कुल लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 38.80 प्रतिशत खेतों का ही सर्वे हो पाया है। इस सुस्त रफ्तार को देखते हुए कृषि विभाग ने चिंता जताई है और बचे हुए काम को हर हाल में 31 अक्टूबर तक पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

लाखों खेतों का सर्वे और पास होना बाकी
राज्य में कुल 26,07,544 खेतों (प्लॉट) का सर्वे करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन अब तक केवल 10,11,834 खेतों का ही ऑनलाइन सर्वे दर्ज हो सका है। इसके अलावा, सर्वे के बाद उसे ऑनलाइन पास (अप्रूवल) करने का काम भी बहुत धीमा है। अब तक सिर्फ 19.77 प्रतिशत यानी 5,15,628 प्लॉट ही अप्रूव हो सके हैं। राज्य में 34,303 पंजीकृत सर्वेयर काम में लगे हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर काम काफी पीछे है।

अधिकारियों को मिले सख्त निर्देश
काम की इस धीमी गति पर सख्ती दिखाते हुए 'समेति' (SAMETI) के निदेशक और नोडल अधिकारी रामशंकर प्रसाद सिंह ने 15 अक्टूबर को सभी जिला कृषि अधिकारियों को एक पत्र भेजा है। सरकारी निर्देश के अनुसार, खरीफ 2026 के सर्वे की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 कर दी गई है और इसके बाद कोई समय-सीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने इलाकों में पर्याप्त सर्वेयर और सुपरवाइजर लगाएं और रोज के काम की कड़ी निगरानी करें।

कई जिलों का प्रदर्शन बेहद खराब
राज्य के 17 जिलों में आधे से भी कम काम हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे खराब स्थिति पश्चिमी सिंहभूम (15.47%), खूंटी (14.76%) और दुमका (21.18%) की है। राजधानी रांची में भी सिर्फ 30.29 प्रतिशत सर्वे ही हो सका है। वहीं, कुछ जिलों ने अच्छा काम किया है। लोहरदगा जिला 80.29 प्रतिशत काम के साथ सबसे आगे है। इसके बाद देवघर (76.82%) और हजारीबाग (64.93%) का नंबर आता है।

 

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