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Fish Farming: सिक्किम में बना देश का पहला जैविक मछली पालन क्लस्टर, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 02 Nov 2026 04:24 PM IST
सार

सिक्किम के सोरेंग जिले में देश का पहला जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर बनाया गया है। PMMSY के तहत 3.75 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू हुईं। जानें इससे मछली किसानों को क्या फायदा होगा।

मछली पालन
मछली पालन - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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सिक्किम के सोरेंग जिले में देश का पहला जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर बनाया गया है। इसका उद्देश्य बिना हानिकारक रसायनों, एंटीबायोटिक और कीटनाशकों के मछली पालन को बढ़ावा देना है। इससे मछली किसानों को बेहतर बाजार और अपनी उपज के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 नवंबर को सिक्किम के मंगन जिले का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 3.75 करोड़ रुपये की मत्स्य पालन परियोजनाओं का उद्घाटन किया। साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में मछलियों के जैविक प्रमाणन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की।

मछली पालन से जुड़ी सुविधाओं पर खर्च होंगे 3.75 करोड़ रुपये
उद्घाटन की गई परियोजनाओं में मछली पालन के लिए हैचरी, मछली आहार बनाने की इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक तकनीक से मछली उत्पादन की सुविधाएं शामिल हैं। इनमें बायोफ्लॉक और रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इन सुविधाओं से मछली उत्पादन, भंडारण और बाजार तक पहुंच को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान मछली किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) भी दिए गए, ताकि वे खेती और मछली पालन से जुड़ी जरूरतों के लिए संस्थागत कर्ज ले सकें। मुख्यमंत्री मत्स्य उत्पादन योजना के तहत पांच मछली किसानों को आर्थिक सहायता के चेक भी दिए गए। इसके अलावा दो मत्स्य सहकारी समितियों के 15 किसानों को मछली का चारा बांटा गया।

बिना रसायन और एंटीबायोटिक के होगा मछली पालन
सोरेंग जिले में बनाए गए जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर में मुख्य रूप से अमूर कार्प, भारतीय प्रमुख कार्प और ट्राउट मछलियों के पालन पर ध्यान दिया जाएगा। इस व्यवस्था में हानिकारक रसायनों, एंटीबायोटिक और कीटनाशकों के इस्तेमाल के बिना मछली उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि सिक्किम में पहले से मौजूद जैविक खेती के माहौल का लाभ मछली पालन को भी मिलेगा। इससे जैविक मछली और उससे बने उत्पादों के लिए देश और विदेश के बेहतर बाजार तैयार करने में मदद मिल सकती है।

जैविक मछली की पहचान और गुणवत्ता तय करने की व्यवस्था
केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन के जैविक प्रमाणन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की। इसके तहत जैविक तरीके से मछली उत्पादन और उसकी पूरी आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखने का ढांचा तैयार किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि मछली का उत्पादन किन तरीकों से हुआ है और वह बाजार तक कैसे पहुंची।

सरकार ने देशभर में मत्स्य उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए क्लस्टर आधारित व्यवस्था अपनाई है। इसके तहत उत्पादन, प्रसंस्करण, उत्पादों में मूल्य जोड़ने और बिक्री से जुड़ी सुविधाओं को एक ही क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत देश में ऐसे 34 क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं। इनमें सिक्किम और मेघालय के जैविक मत्स्य पालन क्लस्टर भी शामिल हैं।

ITBP खरीदेगी सिक्किम की रेनबो ट्राउट मछली
सिक्किम सरकार ने स्थानीय मछली किसानों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के साथ समझौता किया है। इसके तहत ITBP के संस्थानों के लिए स्थानीय स्तर पर पैदा की गई रेनबो ट्राउट मछली खरीदे जाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे ट्राउट पालने वाले किसानों को नियमित बाजार मिलने में मदद मिल सकती है। समझौते में मछली की गुणवत्ता, आपूर्ति की मात्रा, कीमत, जांच और आपूर्ति के समय जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने मछली किसानों की सहकारी समितियों के सदस्यों से भी बातचीत की और उनकी समस्याएं जानीं। कार्यक्रम में मछली, सजावटी मछली, प्रसंस्कृत मछली उत्पादों के साथ डेयरी, पशुपालन और स्थानीय जैविक सब्जियों के उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए। सरकार के मुताबिक, इन पहलों से पूर्वोत्तर क्षेत्र में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, किसानों की आमदनी बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी।
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