धान कटाई सीजन के बीच पंजाब में फसल प्रबंधन को बढ़ावा देने की अहम कड़ी माने जाने वाले कस्टम हायरिंग सेंटर्स को लेकर एक अहम स्टडी सामने आई है। पंजाब किसान विकास चैंबर की इस स्टडी के मुताबिक, राज्य में चल रहे 27,000 से अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर्स के सामने आर्थिक रूप से खुद को बचाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। यह रिपोर्ट शुक्रवार को मुख्य सचिव को सौंपी गई है।
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि मशीनों का कम इस्तेमाल, मौसमी मांग और कामकाज का बढ़ता खर्च, राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन से जुड़े इन सेंटर्स की स्थिति को कमजोर कर रहा है।
कस्टम हायरिंग सेंटर्स के सामने कई चुनौतियां
इस स्टडी में पाया गया है कि इन सेंटर्स को लंबे समय तक चलाए रखने में कई बड़ी रुकावटें आ रही हैं। इनमें मशीनों का साल भर इस्तेमाल न होकर सिर्फ एक सीजन में काम आना, मशीनों को चलाने की ऊंची लागत, मजदूरों की कमी और कामकाज के लिए जरूरी पूंजी तक सीमित पहुंच शामिल हैं।
100 कस्टम हायरिंग सेंटर्स का हुआ सर्वे
यह स्टडी पंजाब के पूर्व कृषि आयुक्त बलविंदर सिंह सिद्धू द्वारा की गई है। उन्होंने पंजाब के 100 कस्टम हायरिंग सेंटर्स का बारीकी से आकलन किया। इस जांच-पड़ताल में प्राथमिक सर्वे, वित्तीय और कामकाज का विश्लेषण, इंटरव्यू और केस स्टडी का सहारा लिया गया है।
पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए पंजाब में 27 हजार से ज्यादा कस्टम हायरिंग सेंटर्स की स्थापना हुई। ये सेंटर किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, बेलर, स्ट्रॉ चॉपर और जीरो-टिल ड्रिल जैसी मशीनें उपलब्ध कराते हैं। रिपोर्ट मानती है कि इन सेंटर्स के खुलने से प्रदेशभर में किसानों तक मशीनों की पहुंच तो बेहतर हुई है, लेकिन अब इन मशीनों का सही से इस्तेमाल और इन सेंटर्स को लंबे समय तक आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना एक बड़ी चिंता बनकर उभरा है।
बेहतरी कैसे होगी? मशीन किराये पर देने से आगे बढ़ें सेंटर
इन सेंटर्स की हालत सुधारने और इन्हें फायदेमंद बनाने के लिए सरकार को कई अहम सुझाव दिए हैं, जिनमें ऐसे सेंटरों को बढ़ावा देने की बात है, जहां किसानों को कई तरह की सेवाएं मिलती हों। इसके अलावा मशीनों को एक जगह इकट्ठा करके क्लस्टर (समूह) के रूप में काम करने को मजबूत करने, जरूरत के हिसाब से मशीनों को एक जिले से दूसरे जिले में ले जाकर काम करने को बढ़ावा देने. सेंटर्स को बायोमास सप्लाई चेन संग जोड़ने और सेंटर्स को मिलने वाली सरकारी मदद को मशीनों के इस्तेमाल और काम के नतीजे से जोड़ने का सुझाव शामिल है।