अर्नब तूफान और बाढ़ के चलते ओडिशा में किसानों को फसल नुकसान उठाना पड़ा है। मौसम की मार झेलने वाले किसानों के लिए प्रदेश सरकार ने विशेष राहत पैकेज का एलान किया है। राहत पैकेज के तहत गन्ना किसानों को फसल प्रबंधन और 'स्पेस ट्रांसप्लांटिंग' पद्धति अपनाने के लिए विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी।
गन्ना किसानों के लिए 27,500 रुपये तक की मदद
रिपोर्ट के अनुसार, पैकेज के तहत गन्ना किसानों को उनकी आवश्यकता के आधार पर स्पेस ट्रांसप्लांटिंग विधि के प्रदर्शन के लिए 27,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त, किसान चाहें तो फसल प्रबंधन के लिए 12,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि का विकल्प भी चुन सकते हैं।
दो हेक्टेयर तक मिलेगा इनपुट सब्सिडी का लाभ
सरकार के अनुसार, जिन किसानों की फसलों को 33 प्रतिशत या उससे अधिक का नुकसान हुआ है, उन्हें अधिकतम दो हेक्टेयर की सीमा तक इनपुट सब्सिडी दी जाएगी। इसके तहत असिंचित भूमि के लिए 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि के लिए 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर और बारहमासी फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, जिन क्षेत्रों में फसलों को 33 प्रतिशत या उससे अधिक नुकसान पहुंचा है, वहां किसानों के अल्पकालिक खरीफ फसल ऋण को मध्यम अवधि के ऋण में बदला जाएगा।
खेतों से गाद हटाने, बीज वितरण और कीटनाशक पर राहत
सरकार के मुताबिक, कृषि भूमि से रेत और गाद हटाने के लिए 18,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता दी जाएगी, जिसमें न्यूनतम सहायता राशि 2,200 रुपये तय की गई है। इसके साथ ही सरकार की ओर से 1.75 लाख बीज किट बांटे जाएंगे, जिनमें 1.2 लाख दलहन किट, 5,000 तिलहन किट और 50,000 सब्जी किट शामिल हैं। प्रभावित किसानों को वर्ष 2026-27 के रबी सीजन के दौरान रासायनिक और जैविक कीटनाशकों पर 75 प्रतिशत की सब्सिडी भी दी जाएगी।
तात्कालिक मदद, केंद्रीय दल का दौरा और नए चक्रवात का खतरा
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि सरकार सभी प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हर प्रभावित परिवार को तात्कालिक राहत के तौर पर 50 किलोग्राम चावल और 2,500 रुपये नकद दिए जाएंगे। इस राहत पैकेज में क्षतिग्रस्त मकानों, पशुधन की हानि, मछुआरों, महिला स्वयं सहायता समूहों, बुनकरों, कारीगरों और छोटे व्यवसायियों के लिए भी वित्तीय सहायता शामिल की गई है।
सीएम के अनुसार, चक्रवात और बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों- गंजम, गजपति और कंधमाल में नुकसान का आकलन करने के लिए एक आठ सदस्यीय अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम 2 से 4 नवंबर तक ओडिशा का दौरा करेगी। उन्होंने बताया कि वह केंद्र सरकार के साथ लगातार संपर्क में हैं और इस स्थिति को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी चर्चा की है। वहीं, एक अन्य चक्रवात 'मुरासु' के संभावित खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों में तैनात सरकारी टीमों को वहीं डटे रहने और राहत व निगरानी का काम जारी रखने का निर्देश दिया है।