गुजरात में इस साल मूंगफली की पैदावार घटने का अनुमान है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के जमीनी सर्वे के मुताबिक, खरीफ सीजन 2026-27 में राज्य में मूंगफली का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 20.5 प्रतिशत कम रह सकता है। इसकी प्रमुख वजह सौराष्ट्र के कुछ जिलों में कम बारिश बताई गई है। सर्वे के अनुसार, इस साल गुजरात में करीब 20.71 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती हुई है और कुल उत्पादन 33.30 लाख टन रहने का अनुमान है।
SEA ने गुजरात के प्रमुख मूंगफली उत्पादक जिलों में 23 से 25 अक्टूबर तक तीन दिन का सर्वे किया। इसमें फसल की स्थिति, उत्पादन, गुणवत्ता और बीज की किस्मों का आकलन किया गया। सर्वे टीम ने किसानों, मिल संचालकों, व्यापारियों और बिचौलियों से भी बातचीत की।
पिछले साल 41.88 लाख टन हुआ था उत्पादन
SEA के मुताबिक, खरीफ सीजन 2025-26 में गुजरात में 22.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की खेती हुई थी। उस दौरान उत्पादन 41.88 लाख टन रहा था। प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार 1,902 किलोग्राम थी।
वहीं, खरीफ सीजन 2026-27 में उत्पादन घटकर 33.30 लाख टन रहने का अनुमान है। इस साल प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार 1,608 किलोग्राम रहने की संभावना है। यानी पिछले साल के मुकाबले उत्पादन के साथ-साथ औसत पैदावार में भी कमी आने का अनुमान है।
सौराष्ट्र में करीब 20% घट सकता है उत्पादन
गुजरात के प्रमुख मूंगफली उत्पादक क्षेत्र सौराष्ट्र में भी उत्पादन घटने की आशंका है। SEA के सर्वे के अनुसार, खरीफ सीजन 2026-27 में सौराष्ट्र में 15.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र से 25.53 लाख टन मूंगफली उत्पादन का अनुमान है। पिछले साल यहां 16.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 31.82 लाख टन उत्पादन हुआ था। इस तरह सौराष्ट्र में मूंगफली का उत्पादन करीब 19.8 प्रतिशत घट सकता है। सर्वे में बताया गया है कि क्षेत्र के कुछ जिलों में बारिश की कमी ने फसल को प्रभावित किया है।
राजकोट और जामनगर में ज्यादा गिरावट की आशंका
सौराष्ट्र के प्रमुख मूंगफली उत्पादक जिलों राजकोट और जामनगर में इस साल उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान है।
राजकोट : यहां उत्पादन पिछले साल के 6.60 लाख टन से घटकर 5.90 लाख टन रहने का अनुमान है।
जामनगर : यहां उत्पादन 5.63 लाख टन से घटकर 3.26 लाख टन रह सकता है।
जूनागढ़ : यहां उत्पादन 4.44 लाख टन से बढ़कर 5.32 लाख टन होने का अनुमान है।
अमरेली : यहां उत्पादन 2.81 लाख टन से बढ़कर 3.38 लाख टन तक पहुंच सकता है।
आंकड़ों से साफ है कि सौराष्ट्र के सभी जिलों में उत्पादन घटने का अनुमान नहीं है। जूनागढ़ और अमरेली में इस साल पिछले सीजन के मुकाबले अधिक पैदावार होने की संभावना जताई गई है।
किसानों और खाद्य तेल कारोबार पर पड़ेगा असर
मूंगफली उत्पादन में संभावित गिरावट का असर किसानों के साथ-साथ तेल मिलों, प्रसंस्करण इकाइयों, व्यापारियों और खाद्य तेल उद्योग पर भी पड़ सकता है। गुजरात देश के प्रमुख मूंगफली उत्पादक राज्यों में शामिल है। ऐसे में यहां उत्पादन में कमी आने से मूंगफली की उपलब्धता को लेकर बाजार की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
SEA के मुताबिक, यह सर्वे किसानों, प्रसंस्करण इकाइयों, मिल संचालकों और कारोबार से जुड़े अन्य लोगों को फसल की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करेगा। सर्वे में 20 से अधिक सदस्यों वाली टीम ने प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों का दौरा किया। टीम में एसके इंडस्ट्री के विनोद पटेल, जीजीएन रिसर्च के राजेश पटेल और SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता शामिल थे।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।