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झारखंड सरकार ने धान खरीद का लक्ष्य घटाया : बोनस में बढ़ोतरी का प्रस्ताव सामने, कैबिनेट से मंजूरी बाकी...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 26 Oct 2026 06:15 PM IST
सार

  • झारखंड में धान खरीद का लक्ष्य 50 लाख क्विंटल से घटाकर 40 लाख क्विंटल किया गया।
  • राज्य सरकार धान पर बोनस 84 रुपये से बढ़ाकर 109 रुपये प्रति क्विंटल करने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखेगी।
  • खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए सामान्य धान का एमएसपी 2,441 रुपये और ग्रेड ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है।
  • प्रस्ताव मंजूर होने पर झारखंड के किसानों को सामान्य धान के लिए 2,550 रुपये और ग्रेड ए धान के लिए 2,570 रुपये प्रति क्विंटल मिलेंगे।

झारखंड सरकार ने घटाया धान खरीद का लक्ष्य।
झारखंड सरकार ने घटाया धान खरीद का लक्ष्य। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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झारखंड सरकार ने प्रदेश के किसानों से एमएसपी पर धान खरीद का लक्ष्य घटा दिया है। इस कदम के बाद खरीद लक्ष्य  50 लाख क्विंटल से घटकर 40 लाख क्विंटल तय कर दिया है। दूसरी तरफ सरकार ने किसानों को मिलने वाली बोनस राशि को बढ़ाने का फैसला लिया है। हालांकि इस प्रस्ताव को अभी कैबिनेट से पास होना होगा।

पहले किसानों को धान बेचने पर प्रति क्विंटल 84 रुपये का बोनस मिलता था। सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार, अब इसे बढ़ाकर 109 रुपये प्रति क्विंटल किया जा रहा है। इस वृद्धि के प्रस्ताव को मंगलवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में अंतिम मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।

बोनस में बढ़ोतरी के बाद कितना होगा मुनाफा?
केंद्र सरकार के अनुसार, खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और अच्छी गुणवत्ता वाले ग्रेड ए धान का मूल्य 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक, 109 रुपये का बोनस जुड़ने के बाद सामान्य धान बेचने वाले किसानों को कुल 2,550 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाएगा। इसी तरह ग्रेड ए धान बेचने वाले किसानों को कुल 2,570 रुपये प्रति क्विंटल की दर से राशि मिलेगी।

सरकार के अनुसार, धान खरीद का लक्ष्य कम होने के बावजूद बोनस की राशि बढ़ने से राज्य के किसानों को सीधा आर्थिक लाभ होगा। कैबिनेट से प्रस्ताव पास होने के बाद इन्ही नई दरों पर धान की खरीद शुरू की जाएगी। इस बार प्रदेश सरकार ने खरीद केंद्रों में ओटीपी के बजाय टोकन व्यवस्था भी लागू कर दी है।
 


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