Home›Khabar Junction›
Saffron Flowers Bloom On Barren Land Ladakh First Success In 30 Days Could Open New Avenues Farmers
लद्दाख की बंजर जमीन पर खिले केसर के फूल: 30 दिन में मिली पहली सफलता, किसानों के लिए खुल सकती है कमाई की नई राह
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Mon, 02 Nov 2026 09:06 AM IST
सार
लद्दाख के लेह में बंजर जमीन पर केसर की खेती का प्रयोग उत्साहजनक रहा। 90 हजार कंदों की रोपाई के 30 दिन में फूल खिलने लगे। जानें इस परियोजना से किसानों को क्या फायदा हो सकता है।
लद्दाख के लेह में बंजर पड़ी जमीन पर केसर की खेती का प्रयोग सफल होता नजर आ रहा है। यहां केसर के पौधों में रोपाई के महज 30 दिन के भीतर फूल खिलने लगे हैं। आमतौर पर केसर में पहली बार फूल आने में करीब दो महीने लगते हैं। ऐसे में तय समय से पहले फूल खिलना लद्दाख में केसर की खेती की संभावनाओं के लिहाज से बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने रविवार को इस प्रयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेत में रोजाना औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं, जबकि रविवार सुबह एक ही दिन में 72 फूल दर्ज किए गए। फूल खिलने के शुरुआती चार दिनों में करीब 22 ग्राम केसर भी इकट्ठा किया गया है।
4,000 वर्ग मीटर बंजर जमीन पर लगाया गया केसर
यह प्रयोग लेह के स्पितुक फारका इलाके में किया जा रहा है। इसके तहत करीब 4,000 वर्ग मीटर बंजर जमीन पर ईरान से लाए गए केसर के लगभग 90 हजार कंद लगाए गए हैं। इनका कुल वजन करीब 800 किलोग्राम है।
यह पहल 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' का हिस्सा है। इस परियोजना का उद्देश्य खराब और बेकार पड़ी जमीन को फिर से उपयोगी बनाकर खेती और अन्य कामों के लायक बनाना है। इसके लिए बहाल की गई इगू-फे सिंचाई नहर से पानी इस खेत तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और केसर की खेती को मदद मिले।
कश्मीर के बाहर भी केसर की खेती की संभावना
भारत में केसर का करीब 90 फीसदी उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है। अब लद्दाख में यह प्रयोग केसर की खेती को नए इलाकों तक पहुंचाने की संभावना तलाश रहा है। यहां की ठंडी जलवायु और ऊंचाई के कारण खेती करना चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में बंजर जमीन पर केसर के फूल खिलना एक उत्साहजनक संकेत है।
हालांकि, अभी यह एक शुरुआती प्रयोग है। प्रशासन इस परियोजना के जरिए यह पता लगाना चाहता है कि लद्दाख की जलवायु और मिट्टी केसर की खेती के लिए कितनी उपयुक्त है और यहां बड़े स्तर पर इसकी खेती करना कितना फायदेमंद हो सकता है।
सफल हुआ प्रयोग तो किसानों को मिलेगा नया विकल्प
अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो लद्दाख में केसर की व्यावसायिक खेती का रास्ता खुल सकता है। इससे स्थानीय किसानों की आमदनी बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और युवाओं को कृषि आधारित कारोबार से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इस काम के लिए कृषि विभाग और खेत में काम करने वाले कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने इसे लद्दाख की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अच्छी पहल बताया।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।