छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पठारी इलाकों में कुट्टू की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बन रही है। रौनी, कवई, महनई और पंडरापाठ जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जा रही है। इस बार बेमौसम बारिश से धान और सब्जियों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन टाऊ की फसल पर इसका अनुकूल असर देखने को मिला है। बारिश के बाद खेतों में टाऊ के पौधों पर अच्छी फूल आए हैं। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को इस साल जिले में टाऊ की खेती से करीब 35 करोड़ रुपये के कारोबार की उम्मीद है।
5,500 एकड़ में टाऊ की खेती, 70 हजार रुपये तक कमाई का अनुमान
कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस साल जशपुर जिले में करीब 5,500 एकड़ क्षेत्र में टाऊ की खेती की गई है। विभाग का आकलन है कि किसानों को प्रति एकड़ लगभग 70 हजार रुपये की शुद्ध आमदनी हो सकती है। इस हिसाब से पूरे जिले में इस साल टाऊ की खेती से करीब 35 करोड़ रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है।
पिछले 12 वर्षों में जिले में टाऊ की खेती का रकबा लगातार बढ़ा है। कम समय में तैयार होने वाली इस फसल में कीट और बीमारियों का प्रकोप भी कम रहता है। इसके अलावा, जशपुर के पठारी और ढलान वाले खेत इसकी खेती के लिए अनुकूल हैं। यही वजह है कि अब टाऊ की खेती जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर स्थित किनकेल गांव तक पहुंच गई है।
जापान और चीन तक है टाऊ की मांग
टाऊ यानी कुट्टू प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-मुक्त होता है। इसका इस्तेमाल व्रत और उपवास में खाए जाने वाले व्यंजनों के अलावा बिस्किट, केक और नूडल्स जैसे खाद्य उत्पाद बनाने में भी किया जाता है।
भारत से जापान और चीन सहित कई विदेशी बाजारों में टाऊ की मांग है। घरेलू इस्तेमाल के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग किसानों के लिए बेहतर कीमत मिलने का एक अवसर बन रही है। कम समय में तैयार होने और कम कीट-बीमारियों वाली इस फसल के कारण जशपुर के किसानों का रुझान पिछले कुछ वर्षों में टाऊ की खेती की ओर बढ़ा है।