रबी सीजन में गेहूं और जौ की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को 1 से 15 नवंबर के बीच बुवाई पूरी कर लेनी चाहिए। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान ने किसानों के लिए यह सलाह जारी की है। संस्थान के अनुसार, सही समय पर अगेती बुवाई करने से बीजों का अंकुरण अच्छा होता है और पैदावार बढ़ती है। बुवाई में देरी होने पर, फसल पकते समय अचानक तापमान बढ़ने से दाने छोटे रह जाते हैं, जिससे उत्पादन घट जाता है।
आपके राज्य के लिए टॉप किस्में
संस्थान ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए खास किस्मों की सिफारिश की है। उत्तर-पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में सिंचित खेतों के लिए 9 किस्में सुझाई गई हैं, जिनमें डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 303, डब्ल्यूपीसी 1270, डीबीडब्ल्यू 327, डीबीडब्ल्यू 332, पीडब्ल्यूडी 872, डीबीडब्ल्यू 370, डीबीडब्ल्यू 371 और डीबीडब्ल्यू 372 शामिल हैं। वहीं, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान के उदयपुर और कोटा में सिंचित खेतों के लिए 8 किस्में हैं, जिनमें डीबीडब्ल्यू 187, डीबीडब्ल्यू 303, डीबीडब्ल्यू 327, डीबीडब्ल्यू 445, जेडब्ल्यू 1399 (एमपी 1399), पीडब्ल्यूडी 906, एचडी 3463 और जेडब्ल्यू 543 शामिल हैं।
संस्थान ने साफ किया है कि किसान केवल अपने क्षेत्र के लिए सुझाई गई किस्मों की ही बुवाई करें, अन्यथा फसल में गंभीर रोग लगने का खतरा रहता है। बीज हमेशा प्रमाणित विक्रेताओं से ही खरीदें।
गेहूं की सीधी बुवाई अपनाने की सलाह
फसल अवशेषों (पराली) को जलाने के बजाय, संस्थान ने हैप्पी सीडर या स्मार्ट सीडर जैसी मशीनों से गेहूं की सीधी बुवाई करने की सलाह दी है। इससे पराली खेत में सड़कर खाद का काम करती है और मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है। इसके अलावा, आवश्यकता से अधिक खाद और पानी के इस्तेमाल से बचने और पौधों की जरूरत के अनुसार संतुलित सिंचाई करने की सलाह दी गई है।