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सितंबर में ग्रामीण बेरोजगारी दर घटी : कामकाजी महिलाओं की भागीदारी और रोजगार की तलाश करने वालों की संख्या बढ़ी

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 16 Oct 2026 11:57 AM IST
सार

  • सितंबर 2026 में देश की बेरोजगारी दर 5% पर रही
  • ग्रामीण बेरोजगारी दर घटकर 4.2% पर आई
  • ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़कर 38.9% हुई
  • गांवों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात बढ़कर 55.5% पहुंचा
  • शहरी महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़कर 25.9% हुई

सितंबर महीने में भारत का रोजगार और श्रम बाजार स्थिर देखने को मिला
सितंबर महीने में भारत का रोजगार और श्रम बाजार स्थिर देखने को मिला - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बीते सितंबर महीने के दौरान भारत का रोजगार और श्रम बाजार स्थिर देखने को मिला। यह स्थिरता ताजा आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के आंकड़ों में दिखने को मिली है। इसी महीने के दौरान ग्रामीण भारत में बेरोजगार में कमी आई और कामगार महिलाओं की भागमीदारी में बड़ा सुधार आया। 

 राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत पर बनी रही, जबकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार संकेतकों में मजबूती दर्ज की गई है।

गांवों में काम करने के इच्छुक लोगों की भागीदारी बढ़ रही
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी मासिक बुलेटिन के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के इच्छुक लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ी है। 15 साल और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए ग्रामीण श्रम बल भागीदारी दर सितंबर में बढ़कर 58 प्रतिशत हो गई, जो पिछले साल इसी महीने में 57.4 प्रतिशत थी।

ग्रामीण बेरोजगारी दर में गिरावट 
वहीं, ग्रामीण बेरोजगारी दर सितंबर 2025 के 4.6 प्रतिशत से घटकर सितंबर 2026 में 4.2 प्रतिशत पर आ गई है।

कार्यबल में ग्रामीण महिलाओं का हिस्सा बढ़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण महिलाओं ने कार्यबल में उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है। ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी दर सालाना आधार पर 1 प्रतिशत बढ़कर 38.9 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण महिलाओं की बेरोजगारी दर घटकर 3.9 प्रतिशत पर आ गई, जो साल 2026 के दौरान दर्ज किया गया इसका सबसे निचला स्तर है। ग्रामीण पुरुषों की बेरोजगारी दर भी 0.3 प्रतिशत घटकर 4.4 प्रतिशत रह गई। गांवों में श्रमिक जनसंख्या अनुपात यानी कुल आबादी में रोजगार पाने वालों का प्रतिशत 54.8 प्रतिशत से बढ़कर 55.5 प्रतिशत हो गया, जिसमें 0.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।

शहरों में भी कामकाजी महिलाओं की संख्या में इजाफा
शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार के मोर्चे पर बेहतरी हुई है, खासकर महिलाओं की भागीदारी और रोजगार दर में सुधार देखा गया है।

आंकड़ों के मुताबिक, शहरी श्रम बल भागीदारी दर अगस्त 2026 के 50.4 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 50.7 प्रतिशत हो गई। इसमें शहरी महिलाओं की भागीदारी दर पिछले महीने के मुकाबले 0.5 प्रतिशत बढ़कर 25.9 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अक्टूबर 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इसके अलावा, शहरों में कुल श्रमिक जनसंख्या अनुपात 47.2 प्रतिशत पर पहुंच गया (यह भी अक्टूबर 2025 के बाद सबसे अधिक है)। शहरों में पुरुषों का WPR बढ़कर 71 प्रतिशत और महिलाओं का WPR बढ़कर 23.5 प्रतिशत हो गया।

राष्ट्रीय स्तर पर 5% पर रही बेरोजगारी दर
मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर 15 साल और उससे अधिक आयु के लोगों की कुल श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) सितंबर 2026 में 55.5 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की समान अवधि से 0.2 प्रतिशत अधिक है। देश का कुल श्रमिक जनसंख्या अनुपात भी 0.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि के साथ 52.7 प्रतिशत पर पहुंच गया।

वहीं, देश की कुल राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत दर्ज की गई, जो सितंबर 2025 के मुकाबले 0.2 प्रतिशत कम है।


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