चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) के अप्रैल से सितंबर महीने के दौरान भारत के चावल निर्यात में मात्र 2.5 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई। इन 6 महीनों में कुल 5.77 अरब डॉलर का चावल विदेश भेजा गया था। इस सुस्ती की पीछे अमेरिरका-ईरान तनाव और माल की ढुलाई लागत में उछाल को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
बीते सितंबर महीने की बात करें तो दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक देश भारत ने 0.96 अरब डॉलर का चावल विदेश भएजा। यह 2025 के इसी महीने की तुलना में 4.2 प्रतिशत ज्यादा है। लेकिन, मध्य पूर्व के आयात देश अभी भी चावल का स्टॉक जमा करने में सावधानी बरत रहे हैं।
चावल के परिवहन में ज्यादा खर्च और समय
निर्यातकों के अनुसार, इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, दम्मम और जेबेले जैसे बड़े बंदरगाहों में कामकाज पर काफी असर पड़ा है। इसी वजह से भारत के जहाजों को लंबा और ज्यादा खर्चीला दूसरा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। दूसरी तरफ सऊदी अरब के जेद्दाह बंदरगाह पर हूती हमलों का सामना करना पड़ा है, जबकि बाब अल-मंडेब समुद्री रास्ते पर बढ़ते तनाव ने गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
चावल निर्यात दबाव का सामना कर रहा
जानकारों के अनुसार, इस समय कई कारक भारत के चावल निर्यात पर दबाव बना रहे है, जिनमें घरेलू बाजार में धान की ऊंची कीमत, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग को लेकर अनिश्चितता, माल ढुलाई का बढ़ता खर्च और देशों के बीच चल रहे विवाद शामिल हैं।
पिछले साल भारत का चावल निर्यात लुढ़का
भारत बीते 10 सालों में दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यादक देश रहा है, लेकिन बीते वित्तीय वर्ष 2026 में बासमती और गैर-बासमती चावल के कुल निर्यात में 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी और यह 11.53 अरब डॉलर पर सिमट गया था।
इस बार 4 प्रतिशत गिरावट के आसार
अमेरिकी कृषि विभाग ने इस बार (2026-27) के दौरान भारत के चावल निर्यात में 4 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया है। विभाग का कहना है कि टूटे और सफेद चावल के निर्यात में कमी आने से कुल निर्यात 2.4 करोड़ टन रह सकता है।
समुद्री उत्पादों के निर्यात में 13% की तेजी
कृषि उत्पादों में दूसरी सबसे बड़ी हिस्सेदारी समुद्री उत्पादों की होती है। FY27 के अप्रैल-सितंबर के दौरान समुद्री उत्पादों का निर्यात 13% बढ़कर 4.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वाणिज्य मंत्रालय के एक शुरुआती अनुमान के अनुसार, सितंबर 2026 में समुद्री उत्पादों का निर्यात 8% बढ़कर 0.84 मिलियन डॉलर हो गया। इन उत्पादों में वन्नामेई और टाइगर झींगा जैसी फ्रोजन किस्में और फ्रोजन मछली शामिल हैं।
भारत के इस निर्यात में उछाल का मुख्य कारण इसके सबसे बड़े बाजार 'अमेरिका' में मांग का तेजी से बढ़ना है। इसके साथ ही यूरोपीय संघ (EU) और अन्य देशों में भी भारतीय समुद्री उत्पादों की पहुंच मजबूत हुई है।