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Poultry Industry: मुर्गी पालन उद्योग पर बढ़ी लागत की मार, सरकार से सस्ते मक्के के आयात की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 04 Nov 2026 11:31 AM IST
सार

महंगे पोल्ट्री फीड और चिकन की कमजोर मांग से परेशान पोल्ट्री उद्योग ने सरकार से नॉन-जीएमओ मक्के के शुल्क मुक्त आयात की मांग की है। ब्रीडर्स ने जिंदा मुर्गे का आधार भाव 110 रुपये प्रति किलो तय किया।

मुर्गी पालन
मुर्गी पालन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अल नीनो के असर और मुर्गे की कमजोर मांग के बीच पोल्ट्री उद्योग बढ़ती लागत से जूझ रहा है। ऐसे में उद्योग ने सरकार से बिना जेनेटिक बदलाव (नॉन-जीएमओ) वाले मक्के के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने की मांग की है। साथ ही, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के ऐसे अनाज को भी पोल्ट्री फीड यानी मुर्गियों के दाने के रूप में इस्तेमाल करने की मांग की गई है, जो इंसानों के खाने योग्य नहीं रह गए हैं।

पोल्ट्री उद्योग के संगठनों और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को हुई बैठक में इस क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा की। बैठक में ऑल इंडिया पोल्ट्री ब्रीडर्स एसोसिएशन (AIPBA), पैन इंडिया ब्रीडर्स एसोसिएशन (PIBCC), TPBA समेत कई संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

जिंदा मुर्गे का न्यूनतम भाव 110 रुपये किलो तय
बैठक में सभी क्षेत्रों के पोल्ट्री ब्रीडर्स ने बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए जिंदा मुर्गे का आधार मूल्य 110 रुपये प्रति किलो तय करने पर सहमति जताई। उनका कहना था कि मुर्गे की कीमतों में हालिया गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। त्योहारों के दौरान खपत कम होने के कारण मांग घटी है और इसका असर कीमतों पर पड़ा है। यह गिरावट अस्थायी है और आने वाले कुछ हफ्तों में कीमतों में सुधार की उम्मीद है।

वेंकटेश्वर हैचरीज प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक केजी आनंद ने बिजनेसलाइन को बताया कि मुर्गे की कीमतों में गिरावट मुख्य रूप से मौसमी कारणों से आई है। आने वाले हफ्तों में मांग बढ़ने के साथ कीमतें भी सुधर सकती हैं।

सरकार से मिलेंगे पोल्ट्री उद्योग के प्रतिनिधि
उद्योग संगठनों ने मक्का की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए नॉन-जीएमओ मक्के के शुल्क मुक्त आयात की मांग की है। साथ ही, बाजार में सोयाबीन की पर्याप्त उपलब्धता का भी जिक्र किया। संगठनों का कहना है कि मुर्गियों के दाने की लागत कम करने के लिए सरकार को जरूरी कदम उठाने चाहिए।

पोल्ट्री संगठनों के प्रतिनिधि अगले सप्ताह के अंत में नई दिल्ली में सरकारी अधिकारियों और नीति निर्माताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे बढ़ती उत्पादन लागत को कम करने और बाजार में मुर्गे की कीमतों को स्थिर रखने के लिए नीतिगत मदद की मांग करेंगे।
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