Home›Khabar Junction›
Pigeon Pea Sowing Increased Still There Crisis On Yield This Year Production Estimated 20 25 Lakh Tonnes
अरहर की बुवाई बढ़ी : फिर भी पैदावार पर संकट, इस साल 20-25 लाख टन उत्पादन का अनुमान
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 04 Nov 2026 11:20 AM IST
सार
खरीफ 2026 में भारत का अरहर उत्पादन 20-25 लाख टन रहने का अनुमान है, जो सरकारी लक्ष्य से काफी कम है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे के कारण पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।
देश में खरीफ 2026 सीजन के दौरान अरहर (तूर) का उत्पादन 20 से 25 लाख टन रहने का अनुमान है। यह केंद्र सरकार के 40 लाख टन के उत्पादन लक्ष्य से काफी कम है। खास बात यह है कि इस बार अरहर की बुवाई का रकबा पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है, लेकिन कर्नाटक और महाराष्ट्र के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सूखे का असर फसल पर पड़ा है। गुजरात और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में भी मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के मानद सचिव सतीश उपाध्याय ने शुक्रवार को संगठन की ओर से आयोजित वेबिनार में फसल का अनुमान पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल के मुकाबले बुवाई में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सीजन के आखिरी दौर में नमी की कमी से पैदावार पर असर पड़ने की आशंका है। यदि उत्पादन उद्योग के अनुमान के आसपास रहता है, तो घरेलू मांग पूरी करने के लिए आयात, सरकारी भंडार और बाजार में उपलब्ध निजी स्टॉक की अहम भूमिका होगी।
बुवाई का रकबा बढ़ा, फिर भी उत्पादन घटने की आशंका
खरीफ 2026 में अरहर की बुवाई 47.25 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले साल यह रकबा 45.95 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार बुवाई क्षेत्र में 2.83 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद उत्पादन कम रहने की आशंका है। इसकी मुख्य वजह बारिश का असमान वितरण और फसल के अहम समय पर खेतों में नमी की कमी है।
जून में कमजोर मानसूनी बारिश के कारण शुरुआती बुवाई में देरी हुई। हालांकि, जुलाई में बेहतर बारिश से कुछ हद तक इसकी भरपाई हुई। लेकिन महाराष्ट्र और कर्नाटक में बीच-बीच में सूखे की स्थिति बनने से मिट्टी में नमी कम हुई और देर से होने वाली बुवाई भी प्रभावित हुई। उपाध्याय के मुताबिक, सीजन के आखिरी दौर में सूखे की स्थिति बनी रहने से फसल की बढ़वार और फलियां बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे पैदावार के साथ अनाज की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। वास्तविक उत्पादन का पता फसल कटाई प्रयोगों के नतीजों के बाद ही चलेगा।
मांग पूरी करने के लिए आयात पर निर्भरता
भारत में अरहर की सालाना खपत करीब 40 से 45 लाख टन रहने का अनुमान है। उद्योग के मुताबिक, उत्पादन कम रहने के बावजूद आयात और उपलब्ध भंडार को मिलाकर कुल आपूर्ति 40 से 50 लाख टन के बीच रह सकती है। इस साल देश में 10 से 12 लाख टन अरहर आयात होने का अनुमान है। वहीं, सरकार के पास 8 से 10 लाख टन और व्यापारियों तथा मिलों के पास 2 से 3 लाख टन का निजी स्टॉक रहने की संभावना है।
आयात में म्यांमार की हिस्सेदारी करीब 3.25 से 3.5 लाख टन रहने का अनुमान है। अफ्रीकी देशों से 8 से 10 लाख टन अरहर आने की संभावना है। इसके अलावा, ब्राजील भी इस साल नए आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। मार्च तक वहां से 10 हजार से 20 हजार टन अरहर की आपूर्ति होने का अनुमान है। उद्योग का मानना है कि इस साल अरहर की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने में आयात और पुराने भंडार की भूमिका अहम रहेगी। हालांकि, फसल की वास्तविक पैदावार का आकलन फसल कटाई के नतीजे आने के बाद ही हो सकेगा।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।