हाल ही में सरकार ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की तमाम मांगों के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। बुधवार को इस समिति की पहली बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें प्रमुख गन्नवा उत्पादक इलाीकों में किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े लोगों के साथ बातचीत करने का फैसला लिया गया।
किसानों, मिलों और विशेषज्ञों से होगी चर्चा
जानकारी के अनुसार, समिति जल्द ही गन्ना किसानों, चीनी मिल संघों, प्रमुख चीनी, गन्ना अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कृषि विश्वविद्यालयों संग बातचीत का सिलसिला शुरू करेगी। इस चर्चा की मदद से गन्ना से जुड़े अलग-अलग वर्गों के विचार और वैज्ञानिक सुझाव जुटाने की योजना है। इस तरह समिति चीनी उद्योग के लिए एक मजबूत, व्यापक और टिकाऊ योजना तैयार कर सकेगी।
क्यों बनाई गई है यह समिति?
बीते दिनों देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसान गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। यह समिति खासतौर से गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी की मांग पर एक रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपेगी। यह समिति चीनी बनाने की लागत, बाजार के हालात और मिलों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कारखानों से बिकने वाली चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को बढ़ाने की मांग को भी परखेगी।
समिति की रिपोर्ट के बाद सरकार लेगी फैसल
बता दें कि यह समिति कर्नाट]क और महाराष्ट्र के गन्ना किसान प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्रीय उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्री के साथ हुई एक अहम बैठक के बाद बनाई गई थी।मंत्रालय के अनुसार, यह समिति सभी पहलुओं की जांच करने के बाद जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट और खास सुझाव सरकार (सक्षम अधिकारी) को सौंपेगी, ताकि उस पर आगे का फैसला लिया जा सके।