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खेती की पढ़ाई में आएगा बदलाव: सिर्फ फसल उत्पादन नहीं, पूरी खाद्य व्यवस्था पर ध्यान दे कृषि शिक्षा- डॉ. जाट

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Thu, 22 Oct 2026 02:27 PM IST
सार

  • कृषि शिक्षा में बदलाव की जरूरत: ICAR प्रमुख डॉ. एम.एल. जाट ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि शिक्षा और शोध को नए सिरे से तैयार करने पर जोर दिया।

  • उद्योगों से बढ़ेगा तालमेल: कृषि विश्वविद्यालयों और उद्योगों के सहयोग से कृषि क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप कुशल पेशेवर तैयार करने की बात कही।

  • खेती से बाजार तक सोचने की जरूरत: फसल उत्पादन के साथ खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार पर भी ध्यान देने की अपील की।

आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट
आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और जैव विविधता के नुकसान जैसी चुनौतियां बढ़ रही हैं। वहीं, लोगों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना भी बड़ी जरूरत है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कृषि शिक्षा और शोध को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम. एल. जाट ने कृषि शिक्षा में वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है।

डॉ. जाट ने अमेरिका के डेस मोइनेस में आयोजित 2026 नॉर्मन ई. बोरलॉग अंतरराष्ट्रीय संवाद के दौरान वर्ल्ड फूड प्राइज फाउंडेशन के एक कार्यक्रम को ऑनलाइन संबोधित करते हुए यह बात कही। वह इस कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी (NAAS) के अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए।

खेती से आगे बढ़कर पूरी खाद्य व्यवस्था पर ध्यान जरूरी
डॉ. जाट ने कहा कि कृषि शिक्षा और शोध को बदलते समय की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना होगा। इसके लिए केवल फसल उत्पादन पर ध्यान देना काफी नहीं है, बल्कि खेती से लेकर खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पूरी खाद्य व्यवस्था को ध्यान में रखना होगा।

उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई। इससे ऐसे कुशल पेशेवर तैयार किए जा सकेंगे, जिनके पास कृषि क्षेत्र की व्यावहारिक जरूरतों के मुताबिक काम करने की क्षमता हो। उन्होंने कहा कि कृषि मूल्य शृंखला के अलग-अलग चरणों में उद्योगों की भागीदारी बढ़ने से किसानों को भी मदद मिल सकती है।

कृषि शोध और नीतियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
डॉ. जाट ने कृषि अनुसंधान और विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर नीति संवाद बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, शिक्षण संस्थानों, उद्योगों और दूसरे संबंधित पक्षों को एक साथ आकर काम करना चाहिए, ताकि उभरती चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाला जा सके। उन्होंने कृषि विज्ञान से जुड़ी नीतियों को तैयार करने में शोध पत्रों, नीति दस्तावेजों और संक्षिप्त सुझावों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।

विदेशों में रह रहे भारतीय कृषि विशेषज्ञों से जुड़ेगा नेटवर्क
डॉ. जाट ने विदेशों में रह रहे भारतीय कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को देश के कृषि शोध एवं शिक्षण संस्थानों से जोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, इससे वैज्ञानिक जानकारी और अनुभव साझा करने के नए अवसर मिलेंगे। भारतीय संस्थानों को वैश्विक स्तर पर विकसित ज्ञान और तकनीक का लाभ भी मिल सकेगा।

उन्होंने कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CAST) के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का जिक्र करते हुए कहा कि इससे कृषि अनुसंधान, क्षमता विकास और ज्ञान के आदान-प्रदान में सहयोग के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

डॉ. जाट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी मजबूत होने से कृषि अनुसंधान, शिक्षा और किसानों तक नई तकनीक पहुंचाने की व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है। इसका लाभ खास तौर पर ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को मिल सकता है। उन्होंने टिकाऊ और जलवायु चुनौतियों का सामना करने में सक्षम कृषि व्यवस्था बनाने के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
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