सरकार ने 28 अक्टूबर को होने वाली साप्ताहिक नीलामी के लिए गेहूं के कुल कोटे में 5,000 टन की कटौती कर दी है। अब इस नीलामी में 1.01 लाख टन गेहूं बेचा जाएगा। इस कटौती के बीच कई राज्यों में प्रोसेसिंग करने वालों और मिल मालिकों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा कीमत पर गेहूं खरीदने को मजबूर हैं, जबकि वर्तमान में पूरे भारत में गेहूं की औसत थोक कीमत 2,910 रुपये प्रति क्विंटल है।
बाजार में कम सप्लाई, मिलों ने कोटा बढ़ाने का सुझाव दिया
जानकारों के अनुसार, खुले बाजार में गेहूं की उपलब्धता कम होने के कारण मिल मालिकों ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह साप्ताहिक नीलामी में गेहूं की मात्रा को लगातार बढ़ाए। मौजूदा स्थिति में मिल मालिक गेहूं की आपूर्ति के लिए पूरी तरह से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई - FCI) पर निर्भर हो गए हैं।
कई राज्यों में कोटा घटा, असम और कर्नाटक के मिल मालिक हैरान
एफसीआई के असम, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान, गुजरात, बिहार और केरल के राज्य कार्यालयों द्वारा जारी की गई नई जानकारी के अनुसार, ताजा दौर का यह आवंटन 21 अक्तूबर को हुई नीलामी की तुलना में लगभग 11,900 टन कम है।
जानकारों के मुताबिक, असम, कर्नाटक और तेलंगाना के मिल मालिक इस बात से हैरान हैं कि सबसे ज्यादा उठान होने के बावजूद सरकार ने उनका कोटा क्यों घटा दिया। उदाहरण के लिए, पिछले दौर में असम में नीलामी के लिए 8,000 टन गेहूं रखा गया था, जिसमें से मिल मालिकों ने सफलतापूर्वक 7,940 टन गेहूं खरीदा था।
पंजाब को मिला सबसे ज्यादा आवंटन
कुल कोटे में कटौती से उलट कुछ राज्यों में आवंटन बढ़ाया भी गया है। 16 अक्टूबर को किए गए आवंटन की तुलना में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में कुल 6,450 टन गेहूं का कोटा बढ़ाया गया है। इस बार पंजाब को सबसे ज्यादा 25,000 टन का आवंटन मिला है, जो पिछले दौर में 23,000 टन था। पंजाब में पिछले दौर में 204 मिल मालिकों और प्रोसेसर ने सफलतापूर्वक 3,065 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 2,861 रुपये प्रति क्विंटल के बीच की कीमत पर गेहूं खरीदा था।