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देश की थाली तक पहुंचेगा हिमाचल का सेंधा नमक : खदान से निकलेगा Gumma Salt, डेढ़ साल बाद फिर शुरू होगा उत्पादन

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 25 Oct 2026 07:17 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की गुम्मा खदान में डेढ़ साल बाद उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। पांच साल में 7,700 टन चट्टानी नमक निकालने का लक्ष्य रखा गया है।

सेंधा नमक
सेंधा नमक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की गुम्मा खदान से निकलने वाला चट्टानी नमक जल्द ही देश के खाद्य बाजार तक पहुंच सकता है। करीब डेढ़ साल से बंद पड़ी इस खदान में दोबारा उत्पादन शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड की नई खनन योजना को भारतीय खान ब्यूरो से मंजूरी मिल गई है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद खदान में नियमानुसार काम शुरू किया जाएगा।

इस परियोजना की खास बात यह है कि खदान से निकलने वाले नमक को खाद्य उपयोग के योग्य बनाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए नमक की गुणवत्ता की जांच, प्रसंस्करण और बाजार में बिक्री की व्यवस्था पर काम होगा। हालांकि, इसे खाद्य उत्पाद के रूप में बेचने से पहले जरूरी गुणवत्ता मानकों को पूरा करना होगा।

पांच साल में 7,700 टन नमक निकालने का लक्ष्य
स्वीकृत खनन योजना के तहत अगले पांच साल में करीब 7,700 टन चट्टानी नमक निकालने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण में खनन क्षेत्र को सुरक्षित तरीके से खोला जाएगा। इसके बाद स्वीकृत तकनीकी डिजाइन के अनुसार उत्पादन शुरू होगा।

नमक की गुणवत्ता और खाद्य उपयोग से जुड़े अध्ययन व परीक्षण के लिए केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान की मदद ली जाएगी। जांच में जरूरी मानक पूरे होने के बाद ही नमक को खाद्य उत्पाद के रूप में बाजार में उतारा जा सकेगा।

खाद्य पदार्थों में हो सकता है इस्तेमाल
गुम्मा से निकलने वाले चट्टानी नमक को सेंधा नमक या रॉक सॉल्ट भी कहा जाता है। इसका इस्तेमाल साबूदाना खिचड़ी, फलाहार, रायता, सलाद और चाट जैसे व्यंजनों में किया जाता है। आयुर्वेद में भी सेंधा नमक का उपयोग प्रचलित है। हालांकि, गुम्मा खदान से निकलने वाले नमक को खाद्य उपयोग के लिए बाजार में उतारने से पहले उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की पुष्टि जरूरी होगी।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर
खदान में दोबारा उत्पादन शुरू होने से इलाके में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। खनन और ढुलाई के अलावा नमक के प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन की व्यवस्था विकसित होने पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

यदि नमक को खाद्य उत्पाद के रूप में बाजार तक पहुंचाने की योजना सफल रहती है, तो गुम्मा के प्राकृतिक संसाधन का व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

तकनीकी बदलाव के कारण बंद था उत्पादन
हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड के मैनेजर प्रेम रंजन सिंह के अनुसार, खनन योजना और तकनीकी डिजाइन में बदलाव के कारण उत्पादन बंद था। अब नई योजना को मंजूरी मिल गई है और कामकाज शुरू करने की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जा रहा है। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियमानुसार उत्पादन शुरू किया जाएगा।
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