केंद्र सरकार ने खेती-किसानी से जुड़ी कृषि अवसंरचना कोष (AIF) योजना की अवधि को आगे बढ़ा दिया है। जानकारों के अनुसार, पहले यह योजना 30 सितंबर 2026 को खत्म होने वाली थी, लेकिन अब इसके कामकाज की समय सीमा 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है। बता दें कि यह योजना कृषि क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर फोकर करती है।
फसल बर्बादी रोकने और अच्छे दाम दिलाने की तैयारी
इस योजना के तहत कोल्ड स्टोरेज, गोदाम और ग्रेडिंग यूनिट बनाने के लिए सरकार की ओर से ब्याज में भारी छूट और लोन की गारंटी दी जाती है। इस योजना की मदद से सरकार का उद्देश्य खेतों के पास ही ऐसी सुविधाएं तैयार करना है, जिससे कटाई के बाद फसल को खराब होने से बचाया जा सके। इससे किसान अपनी उपज को तब तक सुरक्षित रूप से गोदामों में रख सकेंगे, जब तक कि उन्हें बाजार में अच्छा दाम न मिल जाए। यह कदम इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में फसल कटाई के बाद सही रखरखाव न होने के कारण हर साल 1.53 लाख करोड़ रुपये (₹1.53 ट्रिलियन) की कृषि उपज बर्बाद हो जाती है।
योजना को मिला ज्यादा समय, लाखों करोड़ का हुआ है निवेश
मामले से जुड़े एक अधिकारी ने बताया, व्यय विभाग ने योजना को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इससे यह कार्यक्रम बिना रुके चलता रहेगा और योग्य लाभार्थियों को अपने कृषि प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए ज्यादा समय मिल सकेगा।" सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2020-21 में शुरू हुई इस योजना के तहत 25 अक्टूबर तक कर्ज देने वाली संस्थाओं ने 2,28,428 प्रोजेक्ट्स के लिए लगभग 1.03 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। कुल मिलाकर इस योजना ने कृषि क्षेत्र के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई है। आंकड़ों के मुताबिक, इस फंड का सबसे ज्यादा लाभ उठाने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात सबसे आगे हैं।
किसानों के लिए मददगार साबित हो रहा फैसला
पांच उत्तर भारतीय राज्यों के किसान उत्पादक संगठनों के परिसंघ, नॉर्दर्न फार्मर्स मेगा एफपीओ के संस्थापक और निदेशक पुनीत सिंह थिंद ने इस फैसले को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा, योजना के विस्तार से देश भर में कृषि ढांचे को मजबूत करने और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन को सुधारने के लिए लगातार सरकारी मदद सुनिश्चित होती है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में 23 अक्टूबर को केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को ईमेल के जरिए सवाल भेजे गए थे, लेकिन खबर लिखे जाने तक सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था।