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बड़ी इलायची की खेती से लखपति बन रहे किसान : ₹1,800 प्रति किलो का मिल रहा भाव, समझें पूरा गणित

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 26 Oct 2026 09:00 AM IST
सार

  • हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में बड़ी इलायची की खेती से किसान बढ़ा रहे आमदनी।
  • करोट गांव के किसान प्रेम ठाकुर 20 साल से प्राकृतिक तरीके से कर रहे बड़ी इलायची की खेती।
  • बिलासपुर के किसान एक बीघा जमीन से सालाना 2 से 3 क्विंटल बड़ी इलायची उगा रहे हैं।
  • बड़ी इलायची का बाजार भाव 1.80 लाख रुपये प्रति क्विंटल, सिंचाई वाले किसानों को खेती अपनाने की सलाह।
  • नवंबर-दिसंबर में होती है बड़ी इलायची की कटाई, किसानों को खेती से जोड़ने की तैयारी में कृषि विभाग।

बड़ी इलायची की खेती में फायदे ही फायदे।
बड़ी इलायची की खेती में फायदे ही फायदे। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सीमित जमीन और पारंपरिक खेती के बीच, बड़ी इलायची की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का एक शानदार जरिया बन रही है। रविवार को कृषि उप निदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि जिन किसानों के पास सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है, वे बड़ी इलायची उगाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे जंगली जानवर और पक्षी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को बहुत बड़ी राहत मिलती है।

20 सालों का अनुभव और शानदार कमाई
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के करोट गांव के किसान प्रेम लाल ठाकुर अन्य किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गए हैं। वे पिछले 20 वर्षों से प्राकृतिक तरीकों से बड़ी इलायची की खेती कर रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने एक छोटे से भूखंड पर इसे उगाया था, लेकिन अच्छी पैदावार और बाजार में शानदार दाम मिलने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे इसकी खेती का दायरा बढ़ा दिया है।

अपने अनुभव को साझा करते हुए किसान प्रेम ठाकुर ने बताया कि वे करीब एक बीघा जमीन पर सालाना औसतन 2 से 3 क्विंटल बड़ी इलायची का उत्पादन करते हैं। वर्तमान में बाजार में बड़ी इलायची की कीमत लगभग 1.80 लाख रुपये प्रति क्विंटल (यानी 1,800 रुपये प्रति किलोग्राम) मिल रही है।

खेती का तरीका और सिंचाई का महत्व
खेती की तकनीक के बारे में समझाते हुए प्रेम ठाकुर ने बताया कि इसके पौधों को लगभग तीन फीट की दूरी पर लगाया जाता है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पौधों के सही विकास और अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए पानी की पर्याप्त उपलब्धता बहुत जरूरी है।

कृषि उप निदेशक के अनुसार, जिन किसानों के पास सिंचाई की स्थायी (रेगुलर) सुविधा है, वे इस खेती को अपना सकते हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक फसलों की पैदावार कम होती है या जिन जमीनों पर अन्य फसलें उगाना मुश्किल है, वहां स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके बड़ी इलायची को आमदनी का एक मजबूत जरिया बनाया जा सकता है।

कटाई, रख-रखाव और बाजार में मांग
बड़ी इलायची की फसल मुख्य रूप से नवंबर और दिसंबर के महीनों में काटी जाती है। कटाई के बाद इसे अच्छी तरह से साफ किया जाता है, धोया जाता है और सुखाया जाता है। पूरी तरह से सूखने के बाद ही यह उपज बाजार में बिकने के लिए तैयार होती है।

फसल की सही देखभाल और कटाई के बाद की सही प्रक्रिया इसके अंतिम उत्पाद की गुणवत्ता को तय करती है। बड़ी इलायची का उपयोग मसाले के साथ-साथ औषधीय (दवाइयों) उत्पादों में भी किया जाता है। अपनी खास सुगंध और उपयोगिता के कारण बाजार में इसकी हमेशा भारी मांग रहती है।

किसानों को जोड़ने की विभाग की तैयारी
कृषि उप निदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि कृषि विभाग अब किसान प्रेम ठाकुर के साथ मिलकर अन्य किसानों को भी इस पहल से जोड़ने का काम करेगा। इसका उद्देश्य किसानों के लिए आय के नए साधन तैयार करना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि युवा पीढ़ी को खेती को केवल एक पारंपरिक काम मानने के बजाय, इसे स्वरोजगार और आमदनी पैदा करने वाले एक बेहतरीन अवसर के रूप में अपनाना चाहिए।


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