इस साल कम मानसूनी बारिश के कारण राजस्थान में बारिश की कमी 20 प्रतिशत को पार कर गई है। यह बीते 16 सालों में राज्य में सबसे कम बारिश है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि बारिश की इस कमी के कारण राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे खेतों में खड़ी फसलें सूख गई हैं और किसानों को आर्थिक मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ा है।
पाली और जैसलमेर में सबसे ज्यादा सूखा
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, पाली जिले में सामान्य से 58 प्रतिशत और जैसलमेर में 54 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा जालोर में 50 प्रतिशत, बांसवाड़ा में 39 प्रतिशत और सिरोही में सामान्य से 36 प्रतिशत कम बारिश हुई है। बारिश न होने के कारण इन इलाकों में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
बाजरा, मूंग और ग्वार की उपज में गिरावट के आसार
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कृषि विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि खरीफ सीजन के लिए विभाग के उत्पादन अनुमान राज्य की प्रमुख फसलों की पैदावार में बड़ी गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं। अधिकारी के अनुसार, बाजरा, मूंग और ग्वार जैसी मुख्य फसलों के उत्पादन में भारी कमी आएगी। उल्लेखनीय है कि राजस्थान देश भर में ग्वार के सबसे बड़े उत्पादक राज्यों में गिना जाता है।
सरकार ने 80 तहसीलों को सूखे की चपेट में माना
फसलों के खराब होने और पानी की भारी कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने हाल ही में राज्य के कुल 41 जिलों में से 14 जिलों की 80 तहसीलों को गंभीर या मध्यम रूप से सूखा प्रभावित घोषित किया है। सरकार द्वारा सूखाग्रस्त घोषित किए गए इन इलाकों में जोधपुर, बांसवाड़ा और जालोर के हिस्से भी शामिल हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने नए सर्वे की मांग की
दूसरी ओर, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सरकार से मांग की है कि छूटे हुए क्षेत्रों में नया और निष्पक्ष फसल आकलन सर्वे कराया जाए। गहलोत ने रेखांकित किया कि राजस्थान के 41 जिलों की कुल 426 तहसीलों में से केवल 80 को ही सूखाग्रस्त माना गया है, जबकि कई अन्य इलाकों के किसान भी फसल बर्बादी, सूखते कुओं और बढ़ते कर्ज से परेशान हैं और लगातार गुहार लगा रहे हैं।
अर्थव्यवस्था और ग्रामीण बाजार पर असर की आशंका
राज्य की अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ सुभाष चौधरी के अनुसार, कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों का राजस्थान के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में सूखे का असर पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखेगा। उन्होंने बताया कि खाने-पीने की चीजों को दूसरे राज्यों से मंगाना पड़ेगा जिससे राज्य में महंगाई बढ़ सकती है। इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव के कारण दोपहिया वाहनों और ट्रैक्टरों की बिक्री में भी गिरावट आ सकती है।