राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने सोमवार को कहा कि पशुपालन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय आय और रोजगार बढ़ाने में बहुत बड़ा योगदान देता है। उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन में सुधार के लिए ज्यादा से ज्यादा वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की अपील की है।
दूध उत्पादन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर
जोबनेर स्थित राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय में आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि दूध उत्पादन के मामले में राजस्थान पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। राज्यपाल के अनुसार, अब राज्य को पशुओं के इलाज और पशु संरक्षण के क्षेत्र में भी देश में सबसे आगे निकलने का प्रयास करना चाहिए।
सरकारी योजनाओं की सराहना और नस्ल सुधार पर जोर
अपने संबोधन में राज्यपाल ने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही 'मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना' और सरस डेयरी के विस्तार की तारीफ की। उन्होंने ज्यादा दूध उत्पादन के लिए पशुओं को संतुलित आहार (पोषण) देने, उनके स्वास्थ्य की उचित देखभाल करने और नस्ल सुधारने की जरूरत पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने राठी और थारपारकर जैसी राजस्थान की देसी (स्वदेशी) गायों की नस्लों और उनके दूध की बेहतरीन गुणवत्ता के बारे में भी बताया।
'पशु आधार' से 35 करोड़ पशुओं का रखा जा रहा डिजिटल रिकॉर्ड
पशुपालन में तकनीक के इस्तेमाल पर बात करते हुए राज्यपाल बागड़े ने बताया कि 'पशु आधार' पहल के तहत देशभर में 35 करोड़ से ज्यादा पशुओं को 12 अंकों का एक खास पहचान नंबर (यूनीक आईडी) दिया जा रहा है। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य पशुओं के स्वास्थ्य और उन्हें लगने वाले टीकों का पूरा डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखना है। इस कार्यक्रम की शुरुआत में, राज्यपाल ने उन लोगों को सम्मानित भी किया, जिन्होंने पशु चिकित्सा विज्ञान और पशुपालन के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।