राजस्थान के कृषि विभाग ने प्रदेश में खाद की कालाबाजारी, तय दर से अधिक कीमत वसूलने और सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ जबरन अन्य उत्पाद बेचने वाले कृषि आदान विक्रेताओं (डीलरों) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। विभाग के अनुसार, निरीक्षण व्यवस्था को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए तैयार किए गए एक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अब तक 9,000 से अधिक औचक व नियमित निरीक्षण किए गए हैं। इन जांचों के दौरान मिली गंभीर अनियमितताओं को लेकर विभाग ने 250 से अधिक डीलरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है।
कृषि आयुक्तालय द्वारा 23 अक्टूबर, 2026 को जारी नए निर्देशों के मुताबिक, कोई भी डीलर अब किसानों को यूरिया, डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) या अन्य सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ जिंक, सल्फर, कीटनाशक, बायोफर्टिलाइजर या अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जबरन टैगिंग (बंडलिंग) के ऐसे मामलों में केवल खुदरा विक्रेताओं ही नहीं, बल्कि थोक विक्रेताओं, खाद निर्माता कंपनियों और आपूर्तिकर्ता फर्मों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
नियम उल्लंघन पर लाइसेंस रद्द और एफआईआर के निर्देश
कृषि विभाग के अनुसार, नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश (फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर), 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम (एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट), 1955 के कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं। गड़बड़ी की गंभीरता के आधार पर संबंधित डीलर का बिक्री प्राधिकरण (लाइसेंस) निलंबित या रद्द किया जा सकता है, साथ ही आवश्यकता पड़ने पर पुलिस में प्राथमिकी (एफआईआर) भी दर्ज कराई जा सकती है।
जिलों में गठित होंगी विशेष जांच टीमें
विभाग ने सभी जिलों में विशेष निरीक्षण दलों का गठन करने का निर्देश दिया है। ये टीमें खाद कंपनियों, गोदामों, थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानों की नियमित और औचक जांच करेंगी। इस दौरान दुकानों और गोदामों में उर्वरकों की वास्तविक उपलब्धता, स्टॉक रिकॉर्ड, बिक्री रजिस्टर, बिल बुक तथा अन्य कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जाएगी।
24 घंटे में दर्ज शिकायतों पर होगी प्रारंभिक कार्रवाई
किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विभाग ने प्रत्येक जिले में एक उर्वरक शिकायत प्रकोष्ठ (ग्रीवेंस सेल) अथवा हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अनुसार, जबरन अन्य उत्पाद थमाने या अन्य अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर अधिकारियों को प्रारंभिक कार्रवाई शुरू करनी होगी और निर्धारित समय सीमा के भीतर मामले का निस्तारण सुनिश्चित करना होगा।
विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि निरीक्षण करने, शिकायतों का निपटारा करने या दोषियों पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं भी खाद की कालाबाजारी, अधिक दाम वसूलने या जबरन अन्य कृषि उत्पाद दिए जाने का मामला सामने आए, तो वे तुरंत अपने जिले के कृषि कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ यह जांच अभियान लगातार जारी रहेगा।