बिहार के नारदीगंज इलाके में धान कटाई के बाद किसान आलू की बुवाई से जुड़ी तैयारियों में जुट गए हैं। बीते खरीप में धान की रोपाई से छूटे खेतों में भी किसान जुताई कर लाइन से बुवाई कर रहे हैं। अनुकूल मौसम को देखते हुए किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद है। लेकिन, खेती की बढ़ती लागत और बाजार में उपज का सही दाम न मिलने को लेकर किसान आर्थिक चिंताओं से भी घिरे हुए हैं।
पोखराज से लाल गुलाल किस्मों तक का दाम
दूसरी तरफ इलाके में आलू के बीजों की दुकानें भी सज गई हैं। स्थानीय बीज विक्रेता सरफराज आलम के अनुसार, बाजार में कई किस्मों के बीज उपलब्ध हैं। सफेद किस्मों में एसवन, पोखराज और बंगाल ज्योति का बीज 400 रुपये प्रति 45 किलो बैग की दर से बिक रहा है। वहीं, चंद्रमुखी आलू का बीज 500 रुपये और लाल गुलाल का बीज 550 रुपये प्रति 45 किलो बैग के भाव से मिल रहा है। विक्रेता के मुताबिक, इस समय किसानों के बीच एसवन, बंगाल ज्योति, पोखराज और चंद्रमुखी बीजों की सबसे अधिक मांग है।
मौसम बुवाई के लिए सही, आगे बढ़ेगा बुवाई का खर्च
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस समय एक कट्ठा खेत में आलू की बुवाई का खर्च एक हजार से 1,200 रुपये तक आ रहा है, जो आगामी दिनों में बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि मौजूदा मौसम आलू की बुवाई के लिए सही है। आलू के आकार के हिसाब से एक कट्ठा जमीन में लगभग 45 किलो बीज का उपयोग हो रहा है। अच्छी फसल के लिए बुवाई के साथ ही खेतों में यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे जरूरी उर्वरक भी डाले जा रहे हैं।
बाजार की ओर किसानों की नजर
नारदीगंज क्षेत्र के ओड़ो, बस्ती बिगहा, कहुआरा, हड़िया, बलवापर, बरिया और गोतरायन जैसे गांवों में आलू की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। सब्जियों में प्रमुख स्थान रखने वाले आलू की खेती में बहुत मेहनत और पैसों की जरूरत होती है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन जब फसल तैयार होकर बाजार में पहुंचती है, तो उन्हें उपज का सही दाम नहीं मिल पाता। इस वजह से उन्हें कई बार आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। हालांकि, इन तमाम आर्थिक चुनौतियों के बावजूद किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों में मेहनत कर रहे हैं।