राजस्थान में किसान आईडी बनाने के लक्ष्य को 100 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इसी के साथ प्रदेश उत्तर भारत का पहला और पूरे देश का छठा राज्य बन गया है, जिसने किसान आईडी से जुड़े लक्ष्य को पूरा करने में सफलता हासिल की है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने राजस्थान के लिए 90.19 लाख किसान आईडी बनाने का लक्ष्य तय किया है।
एग्रीस्टैक पहल के तहत केंद्र सरकार खेती-बाड़ी से जुड़ी योजनाओं, खाद वितरण और एमएसपी खरीद जैसे मोर्चों पर डिजिटल तकनीक को बढ़ावा दे रही है। इस पहल का एक प्रमुख आधार किसान पहचान पत्र है, जिसे फार्मर आइडी भी कहा जाता है।
जन आधार के जरिए 83 लाख किसान फार्मर आईडी से जुड़े
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2015-16 की कृषि गणना में प्रदेश में कुल 76.54 लाख जोत (खेत) थे। इस हिसाब से किसान आईडी बनाने का काम 100 प्रतिशत का पार करते हुए 118 पर पहुंच गया है। सरकार के अनुसार, इन किसान आईडी को आधार, जमीन के रिकॉर्ड और जन आधार से जोड़ा गया है। वर्तमान में लगभग 83 लाख किसान जन आधार के जरिए किसान आईडी से जुड़ चुके हैं।
62 प्रतिशत रकबा किसान आइडी के तहत आया
विभाग के अनुसार, राज्य के लगभग 99 प्रतिशत गांवों की जमीन की मैपिंग का काम पूरा हो चुका है। रबी सीजन 2025-26 के दौरान 2.72 करोड़ से अधिक भू-खण्डों पर डिजिटल फसल सर्वे किया गया है। इसके चलते प्रदेश के कुल बोए गए क्षेत्र का करीब 62 प्रतिशत हिस्सा अब किसान आईडी के दायरे में आ गया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लगभग 50 लाख लाभार्थियों को भी इस आईडी से जोड़ दिया गया है।
सरकारी सेवाओं और योजनाओं का मिलेगा आसान लाभ
कृषि विभाग के अनुसार, राज्य में एग्रीस्टैक आयुक्तालय की स्थापना की जा रही है, जिसके आंकड़ों को अलग-अलग सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। किसान आईडी के जरिए किसान की डिजिटल पहचान को उसकी खेती की जमीन और फसल की जानकारी के साथ लिंक किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, इस नई व्यवस्था से किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार अपने दस्तावेज (कागज) जमा नहीं करने पड़ेंगे। इसके जरिए असली लाभार्थियों की पहचान करना आसान होगा। साथ ही खाद और बीज का वितरण, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि उपकरण, फसल बीमा और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपज की खरीद जैसी सुविधाएं किसानों के लिए ज्यादा पारदर्शी और आसान हो जाएंगी।
छूटे हुए किसानों के लिए चल रहा विशेष अभियान
कृषि विभाग के अनुसार, जो पात्र किसान अभी तक किसान आईडी से नहीं जुड़ पाए हैं, उनके लिए 1 से 30 सितंबर तक एक खास सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में कृषि पर्यवेक्षकों की विशेष रूप से ड्यूटी लगाई गई है, ताकि हर पात्र किसान को इस डिजिटल तंत्र से जोड़ा जा सके। सरकार के अनुसार, पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों को इसकी सूचना देने और अन्य स्तरों पर सत्यापन (जांच) की पूरी व्यवस्था की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
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