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महाराष्ट्र में सूखे की मार : रोहित पवार ने 77 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कृषि नुकसान का किया दावा

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 28 Sep 2026 04:04 PM IST
सार

रोहित पवार ने दावा किया कि किसानों ने खरीफ फसलों की बुआई पर करीब 95,500 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इन फसलों से करीब 1,28,866 करोड़ रुपये के उत्पादन की उम्मीद थी। लेकिन फसल खराब होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र में सूखे को लेकर सियासत तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने राज्य में 77 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के कृषि नुकसान का दावा किया है। उन्होंने सरकार पर सूखे की गंभीर स्थिति को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और किसानों के लिए तत्काल राहत पैकेज देने की मांग की।

सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित पवार ने फसल नुकसान और बारिश से जुड़े आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि बारिश में कमी और फसलों के बड़े पैमाने पर नुकसान से ग्रामीण महाराष्ट्र गंभीर कृषि संकट से गुजर रहा है। उन्होंने मौजूदा स्थिति को 1972 के ऐतिहासिक सूखे से भी ज्यादा गंभीर बताया। यह तुलना उनका राजनीतिक आकलन है।

राज्य में 20.50 फीसदी बारिश की कमी का दावा
रोहित पवार के मुताबिक, महाराष्ट्र में अब तक कुल 783.6 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से 20.50 फीसदी कम है। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश की कमी के आंकड़े भी बताए।
  • नासिक संभाग : 34.30 फीसदी कमी
  • नागपुर संभाग : 25 फीसदी कमी
  • कोंकण संभाग : 9.80 फीसदी कमी

उन्होंने कहा कि अनियमित मानसून और अल नीनो के असर से खरीफ फसलों पर भी असर पड़ा है। जुलाई में हुई अच्छी बारिश के बाद स्थिति सुधरने की उम्मीद थी, लेकिन बाद में बारिश की कमी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी।

सोयाबीन, कपास, अरहर और मक्का को नुकसान
रोहित पवार ने दावा किया कि किसानों ने खरीफ फसलों की बुआई पर करीब 95,500 करोड़ रुपये खर्च किए थे। इन फसलों से करीब 1,28,866 करोड़ रुपये के उत्पादन की उम्मीद थी। लेकिन फसल खराब होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने खास तौर पर सोयाबीन, कपास, अरहर और मक्का जैसी प्रमुख खरीफ फसलों के नुकसान का जिक्र किया।

उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र करजत-जामखेड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सामान्य से करीब 60 फीसदी कम बारिश हुई है। उनके मुताबिक, किसानों को खेती में लगाए गए खर्च की भरपाई तक नहीं हो पा रही है।

फसल बीमा को लेकर भी उठाए सवाल
रोहित पवार ने फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने जलना के एक प्रभावित किसान से वीडियो कॉल के जरिए बात कराई। किसान ने दावा किया कि प्रीमियम भरने के बावजूद उसे फसल बीमा का भुगतान नहीं मिला। स्थानीय अधिकारियों की ओर से योजना बंद होने की बात कहे जाने का भी दावा किया गया। किसान के अनुसार, फसल नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारी खेत पर भी नहीं पहुंचे।

रोहित पवार ने कहा कि किसानों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से निजी बीमा कंपनियों को कुल 2,394 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया गया, जबकि किसानों को करीब 1,938 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। उन्होंने इस व्यवस्था की समीक्षा की मांग की।

50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर राहत की मांग
रोहित पवार ने राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के तहत मिलने वाली सहायता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा सहायता 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और अधिकतम 17,000 रुपये तक है, जबकि खेती की लागत इससे काफी अधिक है। उन्होंने किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की राहत देने की मांग की। उन्होंने भूमि राजस्व में छूट को भी अपर्याप्त बताते हुए कहा कि इससे किसानों को केवल करीब 400 से 500 रुपये का लाभ मिलता है।

छात्रों और भूमिहीन मजदूरों के लिए भी सहायता की मांग
रोहित पवार ने सूखा प्रभावित जिलों में कॉलेज छात्रों की पूरी फीस माफ करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से फीस माफी के लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान पर्याप्त नहीं है। उन्होंने भूमिहीन कृषि मजदूरों के परिवारों को 25 हजार रुपये की सीधी आर्थिक सहायता देने की भी मांग की।

इसके अलावा उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर सूखे की स्थिति पर अलग से चर्चा करने की मांग की। उन्होंने कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों की जांच और किसानों की ओर से घटिया बीज को लेकर दर्ज 17 हजार से अधिक शिकायतों की जांच की मांग भी उठाई। रोहित पवार ने पिछले तीन वर्षों से लंबित कृषि समृद्धि योजना के 15 हजार करोड़ रुपये जारी करने की मांग की।

 
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