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Rain Delays Sugarcane Harvesting In Up Pressure On Sugar Supply May Increase In November
यूपी में बारिश से गन्ने की कटाई में देरी : नवंबर में चीनी की सप्लाई पर बढ़ सकता है दबाव
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 28 Oct 2026 08:57 AM IST
सार
नवंबर में देश में 23 लाख टन चीनी की मांग का अनुमान है, जबकि अक्टूबर के अंत में करीब 15 लाख टन स्टॉक बच सकता है। यूपी में बारिश से गन्ने की कटाई और चीनी मिलों की पेराई प्रभावित होने की आशंका है।
देश में चीनी का भंडार कम होने के बीच उत्तर प्रदेश में बारिश का अनुमान चीनी उत्पादन के लिए चुनौती बन सकता है। बारिश से गन्ने की कटाई और मिलों में पेराई का काम प्रभावित होने की आशंका है। इससे नवंबर में घरेलू मांग पूरी करने के लिए महाराष्ट्र की चीनी मिलों पर ज्यादा उत्पादन का दबाव बढ़ सकता है।
बिजनेस लाइन की खबर के मुताबिक, उद्योग से जुड़े जानकार कहते हैं कि नवंबर में देश में करीब 23 लाख टन चीनी की मांग रहने का अनुमान है, जबकि अक्टूबर के अंत में करीब 15 लाख टन चीनी का भंडार बचने की उम्मीद है। ऐसे में अगले महीने की मांग पूरी करने के लिए नई पेराई से होने वाला उत्पादन अहम होगा।
पिछले साल के मुकाबले चीनी का उत्पादन बढ़ा
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार, 30 सितंबर को समाप्त हुए 2025-26 चीनी सीजन के अंत में करीब 36 लाख टन चीनी का स्टॉक था। इसी भंडार से नए सीजन में घरेलू मांग पूरी करने में मदद मिल रही थी।
इस्मा के मुताबिक, देश में अब तक 107 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी है। इनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें शामिल हैं। इन मिलों में करीब 4 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है, जबकि पिछले साल इसी समय तक करीब 60 हजार टन उत्पादन हुआ था। उद्योग से जुड़े सूत्रों का अनुमान है कि अक्टूबर के अंत तक करीब 2 लाख टन और चीनी बन सकती है। इससे अक्टूबर में कुल उत्पादन लगभग 6 लाख टन पहुंच सकता है।
नवंबर में मांग पूरी करना हो सकता है चुनौतीपूर्ण
सरकार ने अक्टूबर में घरेलू बाजार में बिक्री के लिए चीनी मिलों को 27 लाख टन का कोटा दिया था। जानकारों के अनुसार, त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के कारण यदि यह पूरा कोटा बिक जाता है, तो नवंबर के लिए करीब 15 लाख टन चीनी ही उपलब्ध हो सकती है। ऐसे में नवंबर की अनुमानित 23 लाख टन मांग पूरी करने के लिए अगले महीने होने वाला उत्पादन बेहद महत्वपूर्ण होगा।
बारिश से पश्चिमी यूपी की मिलों में पेराई शुरू होने में देरी
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई चीनी मिलों ने 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन बारिश के कारण इसमें देरी हुई है। खेतों में नमी बढ़ने से किसान गन्ने की कटाई नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, ज्यादा नमी वाले गन्ने को खरीदने से भी मिलें बच रही हैं। आमतौर पर नवंबर के पहले सप्ताह के बाद गन्ने की पेराई तेज होती है। लेकिन इस बार चीनी का भंडार कम होने के कारण सरकार मिलों पर अक्टूबर में ही पेराई शुरू करने के लिए जोर दे रही है।
30 अक्टूबर को यूपी के कई जिलों में बारिश का अनुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भारत फोरकास्ट सिस्टम के अनुसार, 30 अक्टूबर को पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 20 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में 40 मिलीमीटर तक बारिश का अनुमान है।
मौसम विभाग ने 29 और 30 अक्टूबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई जगह बारिश और कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका जताई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 29 से 31 अक्टूबर के बीच भी कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।
गन्ने की कटाई और चीनी की रिकवरी पर पड़ेगा असर
गन्ना प्रजनक बख्शी राम के मुताबिक, भारी बारिश होने पर गन्ने की पेराई में देरी हो सकती है। खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में खेतों से पानी निकलने तक किसानों को कटाई का इंतजार करना पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि ज्यादा नमी वाले गन्ने की चीनी रिकवरी भी कम हो सकती है। इसी वजह से मिलें ऐसे गन्ने की पेराई से बच सकती हैं। इससे पेराई में देरी के साथ चीनी उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
आयातित चीनी से मिल सकती है कुछ राहत
चीनी की कीमतें बढ़ने से आयातित चीनी की घरेलू बाजार में बिक्री बढ़ने की संभावना है। पहले आयात की लागत ज्यादा होने के कारण इसकी बिक्री सीमित रही थी। सरकार ने दो रिफाइनरियों को घरेलू बाजार में बेचने के लिए 2.65 लाख टन आयातित चीनी की अनुमति दी थी, लेकिन वे 60 हजार टन से भी कम चीनी बेच सकीं। अब कीमतें बढ़ने से आयातित चीनी की बिक्री में तेजी आ सकती है।
हालांकि, नवंबर में चीनी की उपलब्धता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि उत्तर प्रदेश में बारिश के कारण गन्ने की कटाई और पेराई कितनी प्रभावित होती है तथा दूसरी ओर महाराष्ट्र की मिलें कितना उत्पादन कर पाती हैं।
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