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दूध के साथ गोबर से भी कमाई : किसानों से ₹1 किलो खरीदेगी बनास डेयरी, रोज 515 टन गोबर होगा प्रोसेस
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Wed, 28 Oct 2026 01:19 PM IST
सार
बनास डेयरी थराद और राधनपुर में नए प्लांटों से गोबर प्रसंस्करण क्षमता 340 से बढ़ाकर 515 टन प्रतिदिन करेगी। पशुपालकों को गोबर बेचकर अतिरिक्त कमाई और किसानों को जैविक खाद मिलेगी।
गुजरात के बनासकांठा जिले में पशुपालकों की कमाई बढ़ाने के लिए बनास डेयरी गोबर से बायो-सीएनजी बनाने का काम बढ़ा रही है। इसके लिए थराद और राधनपुर में नए बायो-सीएनजी प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनके शुरू होने के बाद डेयरी की गोबर प्रसंस्करण क्षमता मौजूदा 340 टन प्रतिदिन से बढ़कर 515 टन हो जाएगी। इस पहल से पशुपालकों को दूध बेचने के अलावा गोबर से भी नियमित कमाई का मौका मिलेगा।
बनास डेयरी किसानों से करीब 1 रुपये प्रति किलो की दर से गोबर खरीदती है। गोबर का वजन पशुपालकों के घर या फार्म पर ही किया जाता है। इसके बाद हर 15 दिन में दूध के भुगतान के साथ गोबर की कीमत भी सीधे उनके बैंक खाते में भेज दी जाती है। इससे पशुपालकों को गोबर बेचने के लिए अलग से बाजार तलाशने की जरूरत नहीं पड़ती।
गोबर से बनेगी गाड़ियों के लिए गैस और खेतों के लिए खाद
बनास डेयरी फिलहाल चार प्लांट के जरिए रोजाना करीब 340 टन गोबर का प्रसंस्करण कर रही है। थराद और राधनपुर के नए प्लांट शुरू होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 515 टन प्रतिदिन हो जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 30 अक्टूबर को बनासकांठा दौरे से पहले इस विस्तार को खास महत्व दिया जा रहा है।
डेयरी ने फरवरी 2020 में डीसा के दामा गांव से किसानों का गोबर खरीदना शुरू किया था। उसी साल अगस्त में डेयरी ने संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) का व्यावसायिक स्तर का बिक्री केंद्र शुरू किया। इसके बाद अगथला, खुला और विंछीवाड़ा में भी प्लांट शुरू किए गए। इस पहल में जापान की सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) भी साझेदार रहे हैं।
इन प्लांटों में गोबर से बायो-सीएनजी तैयार की जाती है, जिसका इस्तेमाल वाहनों में ईंधन के रूप में किया जा सकता है। प्रसंस्करण के बाद बचने वाले अवशेष से जैविक खाद भी बनाई जाती है। इसे स्थानीय दुग्ध समितियों के जरिए ‘भूमि अमृत’ ब्रांड के तहत किसानों को उपलब्ध कराया जाता है।
जिले में 28 लाख पशु, गोबर से कमाई की बड़ी संभावना
बनासकांठा जिले में करीब 28 लाख पशु हैं। इनमें से लगभग 24 लाख पशु बनास डेयरी से जुड़े पशुपालकों के हैं। अनुमान के मुताबिक, जिले में रोजाना करीब 24,000 टन गोबर पैदा होता है। इतनी बड़ी मात्रा में गोबर उपलब्ध होने से बायोगैस और जैविक खाद उत्पादन को और बढ़ाने की संभावना है।
डेयरी की योजना भविष्य में जिले में करीब 200 प्लांट स्थापित करने की है। गुजरात सरकार के ऊर्जा एवं पेट्रोरसायन विभाग के मुताबिक, प्रस्तावित प्लांट नेटवर्क से हर साल 1,168 लाख किलोग्राम संपीड़ित बायोगैस तैयार की जा सकती है। इससे पशुपालकों को सालाना करीब 875 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है। ये आंकड़े प्रस्तावित नेटवर्क की संभावित क्षमता और लाभ से जुड़े हैं, मौजूदा उत्पादन के नहीं।
बाजार से सस्ती मिल रही बायो-सीएनजी
बनास डेयरी के मौजूदा प्लांटों से तैयार बायो-सीएनजी वाहन चालकों को 75 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जाती है। गुजरात में पारंपरिक सीएनजी की कीमत करीब 92 रुपये प्रति किलो बताई गई है। इस तरह बायो-सीएनजी वाहन चालकों को अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन उपलब्ध कराने में भी मदद कर सकती है।
इस मॉडल में पशुपालकों को तीन तरह से फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पहला, गोबर बेचकर अतिरिक्त आमदनी; दूसरा, गोबर से बनी जैविक खाद की उपलब्धता; और तीसरा, वाहनों के लिए अपेक्षाकृत सस्ता ईंधन। गोबर का भुगतान दूध के बिल के साथ सीधे बैंक खाते में करने से किसानों के लिए भुगतान व्यवस्था भी आसान बनती है। यह पहल भारत और जापान के बीच सहयोग के तहत देशभर में 1,000 बायोगैस प्लांट स्थापित करने की व्यापक योजना का भी हिस्सा है।
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