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Punjab: नर्सरी को बनाया कारोबार, प्याज-लहसुन से शुरू हुआ सफर, अब करेला-खीरा और धान तक पहुंचा, 250 पक्के ग्राहक

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 17 Oct 2026 07:49 PM IST
सार

  • पंजाब के किसान मनप्रीत सिंह ने 2020 में 10 मरला जमीन से प्याज की नर्सरी शुरू की।
  • आज उनके करीब 250 नियमित ग्राहक हैं।
  • प्याज, लहसुन, गोभी, मिर्च और कई सब्जियों के पौधे तैयार करते हैं।
  • नर्सरी के साथ धान, बासमती, गन्ना, लहसुन और डेयरी से भी आमदनी।
  • पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने उन्हें सरदार उजागर सिंह धालीवाल पुरस्कार से सम्मानित किया।

किसान ने नर्सरी को बनाया बिजनेस।
किसान ने नर्सरी को बनाया बिजनेस। - फोटो : AI
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विस्तार
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खेती से ज्यादा कमाई के लिए हमेशा ज्यादा जमीन का होना जरूरी नहीं है, बल्कि उपलब्ध जमीन का सही इस्तेमाल करना ज्यादा अहम है। पंजाब में फिरोजपुर जिले के रहीम के उत्तर गांव के रहने वाले 34 वर्षीय किसान मनप्रीत सिंह ने इसे सच साबित कर दिखाया है। साल 2020 में महज 10 मरला जमीन पर प्याज की नर्सरी से शुरुआत करने वाले मनप्रीत आज एक सफल और बहुआयामी कृषि व्यवसाय चला रहे हैं।

सामाजिक कार्य से लेकर नर्सरी तक का सफर
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मनप्रीत सिंह ने इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है और उन्हें अदालतों में काम करने का भी अनुभव है। साल 2015 और 2016 के दौरान वे नेहरू युवा केंद्र की नशा मुक्ति जागरूकता मुहिम से जुड़े थे, जहां उन्हें बतौर स्वयंसेवक 2,500 रुपये महीना मिलता था। बाद में उन्होंने किसानों को खेत में लगाने के लिए तैयार पौधे (नर्सरी) उपलब्ध कराने के अवसर को पहचाना और खेती की ओर कदम बढ़ाया। तैयार पौधे खरीदने से अन्य किसानों का समय और मेहनत बचती है, जिससे वे अपने खेत की तैयारी पर ध्यान दे पाते हैं।

छोटी शुरुआत से लेकर 250 ग्राहकों तक की पहुंच
मनप्रीत ने एक साथ बड़े इलाके में जोखिम लेने के बजाय बहुत छोटी सी जगह यानी 10 मरला जमीन से प्याज की नर्सरी शुरू की। मांग बढ़ने पर यह एक कनाल, फिर दो और चार कनाल तक फैल गई। आज वे प्याज, लहसुन, गोभी, मिर्च, शिमला मिर्च, कद्दू, लौकी, करेला और खीरा जैसी कई सब्जियों के पौधे तैयार करते हैं। वर्तमान में उनके पास करीब 250 पक्के ग्राहक हैं, जो मुख्य रूप से अपने खेतों के लिए पौधे खरीदने वाले किसान ही हैं।

मौसम और समय के हिसाब से फसलों का चुनाव
मनप्रीत की सफलता हर फसल को उसके सही मौसम के साथ जोड़ने पर निर्भर है। सब्जियों की नर्सरी तय मौसम में तैयार की जाती है और जरूरत पड़ने पर छोटे टनल (पॉलीहाउस) से उनका बचाव किया जाता है। सब्जियों के पौधे 30 से 35 दिन में और प्याज के पौधे 60 से 70 दिन में तैयार हो जाते हैं। एक बार पौधे बिकने के बाद जमीन को दूसरी फसल के लिए तैयार कर लिया जाता है। सब्जियों की नर्सरी का दूसरा सीजन जुलाई-अगस्त के आसपास शुरू होकर दिसंबर तक चलता है।

धान और बासमती की नर्सरी से दोहरा मुनाफा
उनके खेती के काम का एक बड़ा हिस्सा धान और बासमती की नर्सरी तैयार करना भी है। वे करीब 2.25 एकड़ जमीन पर 15 से 16 किस्मों के धान के पौधे तैयार करते हैं। एक ही जमीन पर लगातार नर्सरी के चक्र चलाने से यह इलाका 4.5 एकड़ के बराबर काम करता है। उनके यहां से गए पौधों से करीब 400 से 600 एकड़ जमीन पर खेती होती है। नर्सरी का काम खत्म होने के बाद वे उसी जमीन पर कम समय में पकने वाली धान या बासमती की फसल लगा देते हैं।

लागत और कमाई का सटीक गणित
मनप्रीत के अनुमान के मुताबिक, प्रति मरला जमीन पर नर्सरी तैयार करने में करीब 700 रुपये की लागत आती है और इससे 1,500 रुपये की बिक्री होती है। इस तरह उन्हें प्रति मरला 800 रुपये की बचत होती है। वे एक एकड़ जमीन पर बार-बार नर्सरी लगाकर लगभग 2.25 लाख रुपये की आय का अनुमान लगाते हैं। इसके बाद कम समय वाली धान या बासमती से 60,000 से 65,000 रुपये अतिरिक्त मिलने की संभावना रहती है। हालांकि, उनका कहना है कि यह कमाई हमेशा पक्की नहीं होती, क्योंकि यह मांग, मजदूरी के खर्च, मौसम और बाजार के भाव पर निर्भर करती है।

खेती के साथ-साथ डेयरी से भी अतिरिक्त आमदनी
नर्सरी के अलावा मनप्रीत ने आय के कई और साधन बनाए हैं। वे एक एकड़ में लहसुन उगाते हैं और गुड़ व बीज के लिए गन्ने की खेती भी करते हैं। दो फसलों के बीच के खाली समय में वे खीरे जैसी फसल लगाते हैं। उनके अनुसार, तीन कनाल जमीन पर खीरे की फसल से 70 से 80 दिन में 70,000 से 80,000 रुपये की बचत हो जाती है। खेती के अलावा उनके पास 10 से 12 मुर्रा भैंसों की एक डेयरी भी है, जिसकी कीमत 25 से 30 लाख रुपये आंकी गई है। उनके इस काम में 3 स्थायी कर्मचारियों सहित कुल 12 लोग लगे हुए हैं और पानी बचाने के लिए वे ज्यादातर जमीन पर ड्रिप सिंचाई का इस्तेमाल करते हैं।

जानकारी के अनुसार, खेती के इस बेहतरीन मॉडल के लिए लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने उन्हें 'सरदार उजागर सिंह धालीवाल पुरस्कार' से सम्मानित किया है। मनप्रीत का अगला लक्ष्य नई कृषि तकनीकों को अपनाकर इसी जमीन से अपनी आमदनी को दोगुना करना है। उनकी यह सफलता अन्य किसानों को सिखाती है कि नई जमीन की तलाश करने से पहले, पास मौजूद जमीन का ही सही और पूरी तरह से इस्तेमाल करना ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है।


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