महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में सूखे के कारण पशुओं के चारे की कमी को देखते हुए प्रशासन ने चीनी मिलों को गन्ने की 30 प्रतिशत फसल पशु चारे के लिए आरक्षित रखने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही मिलों को मशीनों के बजाय हाथ से गन्ने की कटाई कराने को कहा गया है। प्रशासन का कहना है कि इससे गन्ने के ऊपरी हिस्से को पशुओं के चारे के रूप में इकट्ठा किया जा सकेगा और उसकी बर्बादी रोकी जा सकेगी।
रिपोर्ट के अनुसार, जिले के सभी पांच तालुका सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके हैं। इसके बाद प्रशासन ने पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने के उपाय शुरू किए हैं।
हाथ से कटाई कराने के पीछे क्या है वजह?
हिंगोली जिला प्रशासन के अनुसार, गन्ना और उसका ऊपरी हिस्सा पशुओं के लिए उपयोगी चारा है। मशीनों से कटाई के दौरान गन्ने के ऊपरी हिस्से खेतों में ही बिखर जाते हैं, जिससे उनका इस्तेमाल नहीं हो पाता। प्रशासन का मानना है कि हाथ से कटाई कराने पर इस हिस्से को इकट्ठा किया जा सकेगा। इससे सूखे के दौरान पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सभी चीनी मिलों को निर्देश लागू करने को कहा
जिला कलेक्टर राहुल गुप्ता ने शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि जिले के सभी पांच तालुका सूखाग्रस्त घोषित हैं। चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चीनी मिलों को ये निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने मिलों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में इन निर्देशों को लागू करने को कहा है, ताकि सूखे की पूरी अवधि में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराया जा सके।