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पंजाब में पराली जलाने की 3144 घटनाएं: 5 जिलों में सबसे ज्यादा केस, 795 FIR दर्ज; 931 खेतों पर रेड एंट्री

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sun, 08 Nov 2026 06:50 PM IST
सार

पंजाब में पराली जलाने के 3,144 मामले सामने आए हैं। तरनतारन सबसे आगे है। जानें किसानों पर कितना जुर्माना लगा, कितनी FIR दर्ज हुईं और कितनी जमीनों पर रेड एंट्री हुई।

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फाइल फोटो - फोटो : गांव जंक्शन डेस्क
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विस्तार
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पंजाब में धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इस सीजन में अब तक राज्य में पराली जलाने की 3,144 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इनमें तरनतारन, फिरोजपुर, संगरूर, बठिंडा और अमृतसर सबसे आगे हैं। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 15 सितंबर से 6 नवंबर के बीच ये घटनाएं दर्ज की गई हैं। आंकड़ों के अनुसार, 5 नवंबर तक राज्य में पराली जलाने के 2,787 मामले सामने आए थे। वहीं, 6 नवंबर तक यह संख्या बढ़कर 3,144 हो गई। यानी एक दिन में 357 नए मामले दर्ज किए गए।

तरनतारन में सबसे ज्यादा पराली जलाने के मामले
पंजाब के पांच जिलों में पराली जलाने की घटनाएं सबसे ज्यादा दर्ज की गई हैं। इनमें तरनतारन पहले स्थान पर है। जिलेवार आंकड़े इस प्रकार हैं-
  • तरनतारन: 611 मामले
  • फिरोजपुर: 410 मामले
  • संगरूर: 281 मामले
  • बठिंडा: 262 मामले
  • अमृतसर: 231 मामले
इन जिलों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है।

किसानों पर 54.55 लाख रुपये का जुर्माना
पराली जलाते पकड़े गए किसानों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई की है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, 1,077 मामलों में किसानों पर कुल 54.55 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। इसमें से 30.05 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत 795 एफआईआर दर्ज की गई हैं। यह धारा सरकारी अधिकारियों के आदेशों का पालन नहीं करने से जुड़े मामलों में लगाई जाती है।

931 किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में हुई रेड एंट्री
पराली जलाने के मामलों में प्रशासन ने 931 किसानों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी दर्ज की है। इनमें सबसे ज्यादा 301 मामले तरनतारन जिले के हैं, जबकि फिरोजपुर में 98 रेड एंट्री की गई हैं।रेड एंट्री होने पर किसानों को अपनी कृषि भूमि के आधार पर बैंक से कर्ज लेने या जमीन बेचने में परेशानी हो सकती है।

दिल्ली-NCR की हवा पर भी पड़ता है असर
पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली-NCR की हवा की गुणवत्ता पर भी पड़ता है। धान की कटाई के बाद किसान गेहूं की बुवाई के लिए खेत जल्दी खाली करना चाहते हैं। धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय होने के कारण कई किसान फसल अवशेषों को जलाने का रास्ता अपनाते हैं। हालांकि, सरकार किसानों को पराली जलाने के बजाय उसके प्रबंधन के लिए मशीनों और दूसरी तकनीकों के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

पिछले वर्षों में पराली जलाने के मामलों में आई थी कमी
पंजाब में पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।
  • 2023: 36,663 मामले
  • 2024: 10,909 मामले
  • 2025: 5,114 मामले
  • 2026: 6 नवंबर तक 3,144 मामले
इस साल का आंकड़ा अभी सीजन के बीच का है। इसलिए अंतिम संख्या में बदलाव हो सकता है। 
 
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