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Karnal Fir Against 4 Farmers Burning Red Entry Made Land Records Crop Will Not Be Able To Be Sold At Msp
पराली जलाने पर 4 किसानों के खिलाफ FIR: जमीन के रिकॉर्ड में हुई रेड एंट्री, MSP पर नहीं बेच सकेंगे फसल
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 08 Nov 2026 04:16 PM IST
सार
हरियाणा के करनाल में पराली जलाने पर चार और किसानों के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। अब तक 10 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। जानिए MSP और सरकारी योजनाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।
हरियाणा के करनाल जिले में पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामलों में चार किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही उन पर जुर्माना लगाने और जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में लाल इंद्राज (रेड एंट्री) करने की कार्रवाई भी की गई है।
इसका असर अब किसानों की खेती और सरकारी सुविधाओं पर पड़ेगा। लाल इंद्राज होने के बाद संबंधित किसान अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर नहीं बेच सकेंगे। इसके अलावा उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होगी।
अब तक 10 किसानों पर हुई कार्रवाई
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह ने बताया कि पराली जलाने के चार नए मामले सामने आए हैं। इनमें रमाना रमानी गांव के ईशम और नन्हा राम, बरनी गांव के शक्ति सिंह और अरडाना गांव के सुरेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
चारों किसानों पर नियमों के मुताबिक जुर्माना भी लगाया गया है। इससे पहले जिले में पराली जलाने के छह मामले सामने आ चुके हैं। उन मामलों में भी संबंधित किसानों के जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में लाल इंद्राज किया गया था। इस तरह करनाल जिले में अब तक पराली जलाने के 10 मामलों में किसानों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
पराली जलाने पर क्या है रेड एंट्री का असर?
पराली जलाने के मामले में किसान के राजस्व रिकॉर्ड में लाल इंद्राज होने से उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
संबंधित किसान अपनी फसल MSP पर नहीं बेच सकेंगे।
सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ लेने में रोक लग सकती है।
जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में पराली जलाने से जुड़ी कार्रवाई दर्ज रहेगी।
पराली प्रबंधन पर मिल रहा 1,200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान
कृषि विभाग ने किसानों से पराली नहीं जलाने की अपील की है। विभाग के मुताबिक, किसान फसल अवशेषों का प्रबंधन इन-सीटू और एक्स-सीटू तकनीक से कर सकते हैं। इन-सीटू तकनीक में पराली को खेत में ही मिट्टी में मिलाया जाता है, जबकि एक्स-सीटू तकनीक में पराली को खेत से बाहर ले जाकर दूसरे कामों में इस्तेमाल किया जाता है। इन तकनीकों को अपनाने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से 1,200 रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिया जा रहा है।
विभाग का कहना है कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की सेहत को भी नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा किसानों को जुर्माने और सरकारी सुविधाओं से वंचित होने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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