तेलंगाना में GI टैग वाली तंदूर तूर दाल के व्यापार में पारदर्शिता लाने और किसानों को बेहतर भाव दिलाने के लिए एक डिजिटल निगरानी प्रणाली को जमीन पर उतारने की योजना बनाई है। इस परियोजना के तहत तंदूर तूर दाल उगाने वाले करीब 65 हजार किसानों को डिजिटल निगरानी के दायरे में लाया जाएगा।
खेत से खरीदार तक की यात्रा पर नजर
प्रोजेक्ट के तहत हर किसान की एक डिजिटल प्रोफाइल बनाई जाएगी। यह प्रोफाइल सीधे किसान की जमीन, उसकी फसल और पैदावार से जुड़ी होगी। फसल को इकट्ठा करने, तैयार (प्रोसेस) करने और खरीदारों तक बांटने की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी।
जीआई इलाके का भी रखा जाएगा ध्यान
किसानों के खेतों का नक्शा तैयार किया जाएगा और यह जांचा जाएगा कि वह खेत पंजीकृत जीआई इलाके में आता है या नहीं। इससे यह साबित हो सकेगा कि उगाई गई उपज असली तंदूर तूर दाल ही है। इस पूरी व्यवस्था से खेत से लेकर बाजार तक दाल के असली होने की पहचान आसानी से हो सकेगी।
किसानों को मिलेगी पहचान, मोलभाव की ताकत बढ़ेगी
डिजिटल प्रोफाइल बनने से सप्लाई चेन में किसानों की आसानी से पहचान हो सकेगी। इससे खरीदारों के साथ मोलभाव करने में किसानों की ताकत बढ़ेगी और उन्हें अपनी फसल का सही दाम मिल सकेगा। इस प्रोजेक्ट का एक खास मकसद कृषि क्षेत्र में महिला किसानों की भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
किसे मिली प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी?
इस प्रोजेक्ट को लागू करने के लिए हैदराबाद की कंपनी को तेलंगाना टेक्नोलॉजी सर्विसेज की ओर से काम सौंपने का नोटिस दिया गया है। यह काम कृषि विभाग के लिए 'राष्ट्रीय कृषि ई-गवर्नेंस योजना' (NeGPA) 2025-26 के तहत किया जाएगा।
TRST01 कंपनी के संस्थापक और सीईओ प्रबीर मिश्रा के अनुसार, यह नई प्रणाली उत्पाद की भौगोलिक पहचान को प्रामाणिक रिकॉर्ड के साथ जोड़ने का काम करेगी, जिसकी आसानी से जांच की जा सकेगी।
तंदूर तूर दाल का इतिहास
तंदूर लाल चना, जिसे आम तौर पर 'तंदूर तूर दाल' भी कहा जाता है, तेलंगाना का पहला ऐसा कृषि उत्पाद है जिसे दिसंबर 2022 में जीआई टैग मिला था। यह जीआई टैग यालाल फार्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी के नाम पर दर्ज है। इस कंपनी ने प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना राज्य कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से इस टैग के लिए आवेदन किया था।