विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Mithila S Makhana Makes Its Mark Globally Piyush Goyal Calls It A Superfood People In Over 20 Countries

विदेश में मिथिला के मखाने ने जगह बनाई : पीयूष गोयल ने बताया सुपरफूड, 20 से ज्यादा देशों के लोगों ने चखा स्वाद

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Tue, 20 Oct 2026 05:22 PM IST
सार

  • बिहार का GI-टैग वाला मिथिला मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है।
  • केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, विदेश में मिथिला मखाना लोगों की पसंद बन रहा है।
  • देश के कुल मखाना उत्पादन का करीब 85% हिस्सा बिहार में पैदा होता है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और इससे जुड़े उत्पादों का निर्यात किया।
  • मखाना कारोबार को बढ़ावा देने के लिए अलग एचएस कोड और राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की शुरुआत की गई है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा विदेश में मिथिला मखाना लोगों की पसंद बन रहा है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा विदेश में मिथिला मखाना लोगों की पसंद बन रहा है। - फोटो : प्रतीकात्मक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, बिहार का जीआई-टैग प्राप्त मिथिला मखाना अपने पोषण संबंधी फायदों और बहुमुखी उपयोग के कारण दुनिया भर में लोगों की पसंद बन रहा है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए मंत्री ने मखाना को एक 'सुपरफूड' बताया और इसकी बढ़ती लोकप्रियता का पूरा श्रेय किसानों की कड़ी मेहनत को दिया है। मंत्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट और सरकार के प्रयासों के साथ मिलकर बिहार के इन स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ले जाने पर तेजी से काम किया जा रहा है।

बिहार में होता है देश का करीब 85 प्रतिशत मखाना उत्पादन
मखाना एक जलीय फसल है, जिसे मुख्य रूप से उथले तालाबों, झीलों और नमी वाले स्थानों में उगाया जाता है। इसके बीजों को भूनकर खाने योग्य बनाया जाता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मखाना उत्पादक देश है और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल उत्पादन का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा अकेले बिहार में पैदा होता है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल और असम में भी इसकी खेती होती है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, भारत ने 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और इससे जुड़े उत्पाद 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय स्थानों पर निर्यात किए हैं। इन विदेशी बाजारों में मुख्य रूप से अमेरिका, मध्य पूर्व और अफ्रीका के देश शामिल हैं।

व्यापार को बढ़ावा देने के लिए लागू हुआ अलग एचएस कोड (HS Code)
सेहत की ओर बढ़ती जागरूकता, मखाने से नए उत्पाद बनने और किसान-उत्पादक संगठनों की बढ़ती भागीदारी से मखाने की मांग पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़ गई है। इस क्षेत्र को और मजबूत करने के लिए, वित्त विधेयक 2025 के तहत जुलाई 2025 में मखाने के लिए एक अलग 'हार्मनाइज्ड सिस्टम' (HS) कोड लागू किया गया है। इस अलग वर्गीकरण से मखाने को व्यापार के लिए एक विशिष्ट कोड मिल गया है, जिससे इसके व्यापार और निर्यात में काफी आसानी होगी।

मखाना विकास के लिए 476 करोड़ रुपये की योजना और नया बोर्ड
सरकार ने मखाना क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए भी कई बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बजट 2025-26 में 'राष्ट्रीय मखाना बोर्ड' की घोषणा की गई थी, जिसे 15 सितंबर 2025 को बिहार में औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया गया। इसके अतिरिक्त, सरकार ने 2025-26 से 2030-31 की अवधि के लिए 476.03 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ 'मखाना विकास के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना' को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत विशेष रूप से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 30 करोड़ रुपये और 2026-27 के लिए 90 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

किसानों के कौशल विकास और बेहतर मार्केटिंग पर सरकार का फोकस
सरकार के अनुसार, इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य मखाने की खेती में रिसर्च और इनोवेशन का समर्थन करना, अच्छी गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और किसानों के कौशल में सुधार करना है। साथ ही, फसल की कटाई, कटाई के बाद के सुरक्षित प्रबंधन, उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग, निर्यात और गुणवत्ता नियंत्रण (क्वालिटी कंट्रोल) को बेहतर बनाना भी इस योजना का अहम हिस्सा है ताकि किसानों की आमदनी में सुधार हो सके।


विज्ञापन
विज्ञापन