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Home› Khabar Junction› Power Outage Farmers Run Generators Overnight To Save Their Crops Spending Up To 6000 For 12 Hours

बिजली गुल : फसल बचाने के लिए रातभर जनरेटर चला रहे किसान, 12 घंटे के लिए 6 हजार तक खर्च

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 07 Oct 2026 03:52 PM IST
सार

तेलंगाना के किसानों का दावा है कि कम वोल्टेज और अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण ट्यूबवेल नहीं चल पा रहे हैं। फसल बचाने के लिए किसान 12 घंटे के जनरेटर का 1,500 से 6,000 रुपये तक किराया दे रहे हैं, जबकि डीजल का खर्च अलग है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आमतौर पर खेतों में पक्षियों की चहचहाहट और पत्तियों की सरसराहट सुनाई देती है, लेकिन तेलंगाना के कई गांवों में इन दिनों खेतों के बीच डीजल जनरेटरों की आवाज सुनाई दे रही है। किसान फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल चलाने को किराए पर जनरेटर लेने को मजबूर हैं।

किसानों का आरोप है कि उन्हें कम वोल्टेज और अनियमित बिजली आपूर्ति मिल रही है। इससे ट्यूबवेल के मोटर-पंप ठीक से नहीं चल पाते। तेलंगाना टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, फसल सूखने से बचाने के लिए किसान जनरेटर किराए पर लेकर सिंचाई कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें 12 घंटे के 4,500 से 6,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

कभी बंद पड़े जनरेटर, अब गांवों में बढ़ी मांग
किसानों के मुताबिक, पहले शहरों और कस्बों में लगभग बंद पड़े जनरेटर अब गांवों में मांग में हैं। मारकूक मंडल के एर्रावल्ली गांव के किसान पांडु ने तीन एकड़ में धान लगाया है। उनका कहना है कि बिजली नहीं मिलने से फसल सूखने लगी तो उन्हें लगातार दो दिन जनरेटर चलाना पड़ा।

पांडु के मुताबिक, किसानों को मुश्किल से आठ घंटे बिजली मिलती है। बिजली आने के दौरान भी वोल्टेज कम-ज्यादा होता रहता है। इससे खेतों में लगे मोटर-पंप जल जाते हैं। इसके बाद किसान को मोटर निकालने, मरम्मत कराने और दोबारा ट्यूबवेल में लगाने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।

जनरेटर के साथ डीजल का भी खर्च
ऐसे में किसान जनरेटर किराए पर लेना बेहतर विकल्प मान रहे हैं। मेडक जिले के चेलमाडा गांव के किसान संतोष शर्मा के मुताबिक, 12 घंटे के लिए जनरेटर का किराया करीब 1,500 से 4,500 रुपये तक है। इसके अलावा डीजल का खर्च भी किसान को ही उठाना पड़ता है। उनके मुताबिक, जनरेटर करीब तीन लीटर डीजल प्रति घंटे खपत करता है। इसके अलावा जनरेटर को नजदीकी कस्बे से खेत तक लाने और वापस ले जाने का खर्च भी किसानों को देना पड़ता है।

रात में सिंचाई, खेतों में जागने को मजबूर किसान
किसानों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति मुख्य रूप से रात में किए जाने के कारण उन्हें रातभर खेतों में रहना पड़ता है। जनरेटर का ईंधन भी हर दो से तीन घंटे में भरना पड़ता है। किसान नरसिम्हा रेड्डी का कहना है कि बीआरएस सरकार के करीब 10 साल के कार्यकाल में उन्होंने बिजली कटौती और कम वोल्टेज की ऐसी समस्या नहीं देखी थी। किसानों का कहना है कि जनरेटर पर लगातार खर्च करने से उनकी बचत काफी कम हो रही है, लेकिन फसल बचाने के लिए उनके पास फिलहाल दूसरा विकल्प नहीं है।
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